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आवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय, रीवा के हिंदी विभाग की पूर्व छात्रा श्रीमती गीतांजलि शुक्ला का नाम आज किसी परिचय का मोहताज नहीं है. उनकी वेबसाइट gitanjalididi.in हिंदी भाषा और साहित्य को लेकर जुनून से सराबोर एक ऐसा मंच है, जहाँ ज्ञान और संस्कृति का सुंदर समंदर लहराता है. गीतांजलि दीदी अपने लेखन के जरिए न सिर्फ हिंदी का प्रचार करती हैं, बल्कि आमजन को साहित्य, इतिहास, संस्कृति और समसामयिक विषयों से जोड़ने का काम भी करती हैं. उनकी भाषा सरल, रोचक और प्रभावी होती है, जो पाठक के मन को छू लेती है. वे जटिल विषयों को भी इतने सहज ढंग से प्रस्तुत करती हैं कि पाठक बिना किसी बोझ के ज्ञान का खजाना अपने में समेट लेता है.

गीतांजलि दीदी का रुचि का क्षेत्र धार्मिक विषय वस्तु, हिन्दी कहानिया, और सामाजिक विषय हैं। वे इन क्षेत्रों में उत्साही लेखन करती हैं और अपने लेखों के माध्यम से दूसरों को भी इन विषयों के प्रति जागरूक करने का प्रयास करती हैं। गीतांजलि दीदी का बचपन से ही धर्म में गहरा लगाव रहा है। वे विभिन्न धर्मों के ग्रंथों और विचारों का अध्ययन करती हैं और इनके माध्यम से लोगों को धर्म के सच्चे अर्थ को समझने में मदद करती हैं। वे धार्मिक कट्टरता और हिंसा के खिलाफ भी आवाज उठाती हैं। गीतांजलि दीदी को हिन्दी कहानियों में बहुत रुचि है। वे विभिन्न लेखकों की कहानियों को पढ़ती हैं और इनके माध्यम से लोगों को समाज के विभिन्न पहलुओं से रूबरू कराती हैं। वे स्वयं भी हिन्दी कहानियाँ लिखती हैं, जो सरल, रोचक और प्रभावी होती हैं।


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