एक गांव में मंगला नाम की एक औरत रहती थी। उसके दो लड़के थे, एक का नाम अमन और दूसरे का नाम अमर था। अमर सबसे बड़ा लड़का और अमर छोटा लड़का था।

मंगला का पति बहुत साल पहले गुजर गया था, इसलिए मंगला अकेले ही अपने दोनों बच्चे का लालन-पालन और पढ़ाई-लिखाई कराने की जिम्मेदारी निभा रही थी। अमर और अमन अब दोनों बड़े हो चुके थे। दोनों की पढ़ाई की चिंता अब मंगला को सताने लगी थी। एक दिन मंगला का भाई मंगला के यहां घूमने आया। तो मंगला में अपने चिंता का कारण अपने भाई को बताया कि – “मैं अपने दोनों लड़कों को कॉलेज की पढ़ाई के लिए शहर भेजना चाहती हूं पर मेरे पास पैसे नहीं है।”

तब मंगला के भाई ने कहा कि – “मेरे पास भी पैसे नहीं है, लेकिन मैं तेरे एक लड़के को पढ़ा सकता हूं। पहले तू यह बता कि तेरे लड़के पढ़ने में कैसे हैं? तो मंगला ने कहा – “बड़ा वाला लड़का पढ़ने में तो अच्छा नहीं है, लेकिन छोटा वाला लड़का अमन पढ़ने में बहुत अच्छा है और होशियार है।”

यह सुनकर मंगला के भाई में कहां कि – “तू दोनों को पढ़ा कर पैसे बर्बाद मत कर अपने छोटे बेटे को शहर भेज दे, उसकी पढ़ाई का खर्चा मैं देख लूंगा, क्योंकि वह पढ़ने में होशियार है इसीलिए उसे ही आगे पढ़ाना चाहिए और तेरा बड़ा लड़का अमर पढ़ने में होशियार नहीं है तो उसे यही गांव में कोई नौकरी चाकरी लगवा दे। यहां नौकरी करके कुछ पैसे कमाएगा और तेरे साथ रह कर तेरी सेवा भी करेगा।”

मंगला को अपने भाई की यह सलाह बहुत ही पसंद आई, उसने भाई की मदद से अपने छोटे लड़के अमन को पढ़ाई लिखाई के लिए शहर भेज दिया और गांव के सरपंच से बात करके अमर को गांव के ही एक छोटे से ढाबे में रखवा दिया। गांव के ही ढाबे में अमर काम करने लगा, और थोड़े थोड़े पैसे कमा कर मां की घर चलाने में मदद करने लगा।

इधर शहर में अमन की पढ़ाई भी पूरी हो गई और वह शहर के एक बहुत बड़े फूड चैन होटल में मैनेजर की नौकरी पा गया। यह खुशखबरी सुनाने के लिए वह गाँव आ गया और अपनी मां और भाई को मिठाई खिलाकर, उसे अपने नौकरी लगने की बात बताई। उसने अपने मां को बताया कि – “उसकी शहर में एक बहुत बड़े फूड चैन होटल में नौकरी लग गई है।”

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मां ने पूछा – “यह फूड चैन होटल क्या होता है?”

तब बड़े लड़के अमर ने बताया कि ऐसे होटल, जिनकी साखा अलग-अलग शहरों में खुली होती हैं, ऐसे होटलों को फूड चैन होटल कहते हैं। यह सुनकर मंगला ने अपने छोटे बेटे को खूब आशीर्वाद दिया।

अगले ही दिन अमन अपने बड़े भाई और मां को लेकर शहर आ गया और तीनों मिलकर शहर में रहने लगे। एक दिन शाम को काम खत्म करके अमन जब घर आया तो उसने अपने बड़े भाई और अपनी मां को बताया की – “आज रात को हमारे होटल के बॉस हमारे यहां डिनर के लिए आ रहे हैं।”

मां ने कहा – “यह तो बहुत अच्छी बात है, तू बाजार से सब्जी भाजी ले आओ, मैं उनके लिए खाना बना देती हूं।”

तो अमर ने मां को मना कर दिया कि – “माँ! तेरी तबीयत ठीक नहीं रहती है, इस लिए अमन के बॉस के स्वागत के लिए मैं खाना बना दूंगा।”

अमन अच्छी सैलरी वाली नौकरी करता था, इसलिए वह थोड़ा घमंड में रहता था और अपने बड़े भाई को कम आंका करता था। उसे लगता था, की उसके भाई को कुछ नहीं बनता और वह हमेशा गरीब का गरीब ही रहेगा।

अमन ने ताजुब से बोला कि – “तुम खाना कब सीख लिए? और क्या तुम से खाना बनता भी है?”

तब अमर ने कहा – “हां मैं गांव में एक छोटे से ढाबे में काम करता था। वहां रहकर मैंने खाना सीख लिया, तुम चिंता मत करो, तुम्हारा बॉस जब मेरे हाथ का बना खाना खाएगा तो उंगलियां चाटता रह जाएगा।”

तभी दरवाजे का डोर बेल बाजार तो अमर ने कहा – “देखो अमन लगता है, तुम्हारे बॉस आ गए हैं। मैं दरवाजा खोलता हूं।”

अमन ने तुरंत अमर को रोका और कहा कि – “तुम्हारे पास कपड़े पहनने के सलीके नहीं है। तुम गरीब और अनपढ़ की तरह कपड़े पहनते हो, इसलिए तुम दरवाजा मत खोलना, वरना बॉस को लगेगा कि हम लोग कितने पिछड़े लोग हैं। और जब तक बॉस रहेंगे तो तुम बॉस के सामने मत आना, किचन में ही रहना।”

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अमर को अमन की बाते सुन कर थोड़ा सा बुरा लगा, लेकिन फिर उसने सोचा कि उसका भाई पढ़ा लिखा है तो सही बोल रहा होगा।

अमन बॉस को अंदर लेकर आया और अपनी मां से परिचय करवाया, कुछ देर बातचीत होने के बाद, बॉस को खाना परोसा गया। बॉस ने खाना खाया तो उसे खाना बहुत पसंद आया और उसने खाने की बहुत तारीफ की इसके बाद उसने अमन से पूछा कि खाना किसने बनाया है? अमन कुछ बोल पाता उसके पहले ही मंगला ने बताया कि – “यह खाना मेरे बड़े बेटे अमर ने बनाया है, वह खाना बहुत ही स्वादिष्ट बनाता है।”

बॉस ने अमन की ओर देखा और बोला – “तुमने अपने भाई से तो मुझे मिलवाया ही नहीं, मैं तुम्हारे भाई से मिलना चाहता हूं। वह बहुत ही स्वादिष्ट खाना बनाता है। इसके बाद अमर ने भारी मन से अपने बड़े भाई अमर को बुलाया। अमर के आते ही बॉस ने अमर की खूब तारीफ की और उसे अपने होटल में मुख्य हलवाई के रूप में नौकरी देना चाहा। और कहा कि अगले दिन होटल आकर तुम्हें एक स्वादिष्ट खाना बनाना होगा, हम उसे टेस्ट करेंगे और तुम्हारी नौकरी पक्की हो जाएगी।

अगले दिन अमर होटल पहुंच गया और एक लाजवाब स्वादिष्ट खाना बनाकर होटल के मैनेजमेंट टीम के सामने परोसा। होटल की मैनेजमेंट टीम ने जब उस खाने को चखा तो उन्हें वह खाना बहुत ही स्वादिष्ट लगा।

तभी बॉस ने अमर से कहा कि – “मुझे तुम्हारा स्वादिष्ट बनाया हुआ ,यह भोजन बहुत ही अच्छा लगा। लेकिन मुझे दुख है कि तुम्हारा भाई तुम्हें यहां नौकरी करता हुआ नहीं देखना चाहता। मैं जब आज अपने घर से होटल में आ रहा था, तभी मैंने अमन को एक चौराहे में खड़े होकर अपने एक कर्मचारी से बात करते हुए देखा तो मैं वहां चुपचाप खड़ा होकर इनकी बात सुनने लगा। तो मैंने सुना कि अमन मेरे उस कर्मचारी से कह रहा है कि जब तुम मेरे होटल पर आ कर खाना बनाना, तब वह कर्मचारी तुम्हारे खाने में अधिक नमक डाल देगा। इसकी वजह से तुम्हें यह नौकरी नहीं मिल पाएगी।”

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यह सुनकर अमर ने अपने भाई अमन से इसका कारण पूछा तो अमन ने कहा कि मैं इतनी पढ़ाई लिखाई करके यहां तक पहुंचा था और तुम बिना पढ़े लिखे यहां नौकरी करने वाले थे और मेरे जितना ही वेतन पाने वाले थे। यह मुझे बर्दाश्त नहीं था और मैं चाहता था कि जीवन भर तुम मेरे दिए हुए पैसों में ही अपना जीवन जियो और मेरे प्रति एहसानमंद रहो। इसलिए मैंने ऐसा किया था। लेकिन मुझे अब अपने किए गए, इस काम पर पछतावा है। मुझे माफ कर दो मेरे भाई।

तभी बॉस ने कहा की – “अमर आज से तुम हमारे यहां काम करोगे और तुम्हारे भाई अमन को आज ही मैं नौकरी से निकाले दे रहा हूं।”

यह सुनकर अमर ने तुरंत बॉस से कहा – “नहीं सर ऐसा मत करिए, मेरे भाई से एक छोटी सी गलती हो गई है। उसके लिए इतनी बड़ी सजा उसे मत दीजिए। आप उसे माफ कर दीजिए उसने मेरे प्रति जो भी किया, मैंने उसे माफ कर दिया।”

अमन ने जब यह सुना तो वह रो पड़ा और अपने भाई के पैरों में गिर गया इसके बाद दोनों भाई हंसी-खुशी उस होटल में काम करने लगे और हंसी-खुशी उनका जीवन बीतने लगा।

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