1. स्वार्थी जमींदार – हिन्दी कहानी

किसी किसान के बाग में शरीफे का एक पेड़ था। उस पेड़ पर बहुत ही स्वादिष्ट फल लगते थे।
एक दिन वह एक जमींदार के पास उसे खुश करने के लिए कुछ शरीफे ले गया। जमींदार ने शरीफे खाए तो बहुत खुश हुआ।
फल उसे इतने पसन्द आए कि उसने इरादा कर लिया कि वह उस पेड़ को हथिया लेगा।
उसने अपने आदमी भेज कर वह पेड़ किसान के खेत से उखड़वाया और अपने खेतों में लगवा लिया।
चूंकि बेचारा किसान गरीब था, इसलिए कुछ बोल नहीं सका, लेकिन पेड़ उखाड़ने के दौरान उसकी जड़ों को बहुत नुकसान पहुंचा।
इसलिए जब नई जगह पर उस पेड़ को लगाया गया तो वह जड़ नहीं पकड़ सका।
पेड़ धीरे-धीरे सूख बरबाद हो गया। जब किसान को इस बात का पता चला तो वह उदास हो गया और धीमी आवाज में बोला- स्वार्थ का यही फल होता है।
अगर वह पेड़ को उखड़वाता नहीं तो आज भी उसमें स्वादिष्ट फल लगते और हम दोनों को मिलते रहते।
Moral – स्वार्थी लोग हमेशा दूसरों को नुकसान पहुंचाते हैं।
 
2. शिकारी शिकार बन गया – Hindi Stories
एक बार एक शिकारी किसी घने जंगल से होकर गुजर रहा था। उसके पास बंदूक भी थी। जब वह जंगल के अंदर गया तो उसने पेड़ की एक डाल पर एक कबूतर बैठा देखा।
उसने अपनी बंदूक से कबूतर का निशाना लिया और बंदूक चलने ही वाला था कि पीछे से एक सांप आया और उसे डस लिया। शिकारी अपने शिकार पर गोली नहीं चला सका और नीचे गिर पड़ा।
सांप का जहर तेज था कि उसका शरीर नीला पड़ने लगा। वह जमीन पर लोटने लगा। उसके मुंह से झाग निकलने लगे।
मरते समय शिकारी ने सोचा- सांप ने मेरे साथ वही किया जो मैं उस मासूम कबूतर के साथ करना चाहता था।
Moral – दूसरों का बुरा करने वाला खुद ही मुसीबत में फंसता है।
 
3. बुद्धिमान किसान – Hindi Story
एक दिन एक किसान मेले से अपने घर लौट रहा था। उसने मेले से एक भैंस ने खरीदी थी। जब वह जंगल से होकर जा रहा था तभी एक डाकू उसका रास्ता रोक लिया।
उसके हाथ में एक मोटा-सा डंडा था। वह बोला – तुम्हारे पास जो कुछ भी है, वह सब मुझे दे दो। किसान डर गया उसने अपने सारे पैसे डाकू को दे दिए।
तब डाकू बोला – अब मुझे तुम्हारी भैंस भी चाहिए। यह सुनकर किसान ने भैंस की रस्सी भी भी डाकू के हाथ में दे दी।
फिर किसान बोला – मेरे पास जो कुछ भी था, मैंने तुम्हें दे दिया। अब आप मुझे अपना डंडा दे दीजिए।
डाकू ने पूछा – लेकिन तुम्हें इसकी क्या जरूरत है ? वह बोला – मैं यह डंडा अपनी बीवी को दूंगा ।
यह डंडा देखकर वह बड़ी खुश होगी कि मैं मेले से उसके लिए कुछ तो लाया हूँ। डाकू ने डंडा किसान को दे दिया। किसान ने जल्दी से डाकू को जोर-जोर से मारना शुरू कर दिया।
डाकू पैसे और भैंस छोड़कर वहाँ से भाग गया। इस तरह से बुद्धिमान किसान ने अपना सामान डाकू से बचा लिया।
 
4. बुद्धिमान यात्री – Hindi Story
एक यात्री घोड़े पर बैठे हुए कहीं जा रहा था। जंगल को पार करते समय उसे थकान महसूस होने लगी। इसलिए वह घोड़े से नीचे उतरा और एक पेड़ के नीचे लेट गया।
जल्दी ही उसे नींद आ गई। उसका घोड़ा वहीं पास में चरने लगा। कुछ घंटों बाद जब वह उठा तो उसने देखा कि उसका घोड़ा गायब है।
उसने उसे वहाँ चारों ओर ढूँढा, लेकिन उसे घोड़ा नहीं मिला।
तब उसने अपना मोटा डंडा उठाया और घोड़ा चुराने वाले को ढूँढने लगा। घोड़े को ढूँढते-ढूँढते वह पास के गाँव में पहुँच गया।
वहाँ पर उसने अपना डंडा घुमाते हुए चिल्लाकर कहा, मेरा घोड़ा किसने चुराया है ?
जिसने भी ये किया है वह मेरा घोड़ा लौटा दे, वरना मैं वही करूँगा, जो मैंने पिछली बार किया था। चोर उसी गाँव का था।
उसकी बात सुनकर चोर डर गया और वह तुरंत घोडे को ले आया।
फिर वह यात्री के सामने हाथ जोड़कर बोला, मुझे माफ कर दो। ये रहा तुम्हारा घोड़ा। लेकिन ये तो बताओ कि जब पिछली बार तुम्हारा घोड़ा चोरी हुआ था,
तब तुमने क्या किया था? यात्री बोला, कुछ भी नहीं! मैंने नया घोड़ा खरीद लिया था। ये कहकर वह जोर जोर से हँसने लगा।
 
5. घमंडी गधा – Hind Story
एक दिन एक जौहरी और एक लौह व्यापारी अपने-अपने गधों पर सवा होकर कहीं जा रहे थे।
जौहरी के गधे की पीठ पर रेशम का कपड़ा था और वह सोने की मुद्राओं और कीमती जवाहरातों से भरे हुए थैले ढो रहा था।
वहीं लौह व्यापारी का गधा कुछ लोहे की छड़ें ढो रहा था। जौहरी के गधे को अपनी पीठ पर कीमती सामान होने की वजह से घमंड हो गया। उसकी घमंडपूर्ण बातें दूसरा गधा सुन रहा था।
जब वे जंगल से गुजर रहे थे, डाकुओं के एक गिरोह ने उन्हें रोक लिया। डाकुओं को देखकर जौहरी एवं व्यापारी अपने-अपने गधों को छोड़कर भाग गए। डाकू सामान को देखने लगे।
उन्हें लौह व्यापारी के गधे की पीठ पर रखे सामान में कुछ भी कीमती सामान नहीं मिला। इसलिए उन्होंने उसे छोड़ दिया।
जौहरी के गधे की पीठ पर कीमती सामान देखकर वे उस पर लदे थैलों से सामान निकालने लगे।
जब गधा थोड़ा सा भी विरोध करता, वे उसे खूब जोर-जोर से मारते। इस तरह उस घमंडी गधे को सबक मिल गया कि घमंड करना ठीक नहीं है। घमंडी लोगों को हमेशा नीचा दिखना पड़ता है।
 
6. कड़वा सच – Short Stories
शेर के जन्मदिन के मौके पर दावत की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई थीं। सभी पशु-पक्षी सज-धजकर ठीक समय पर समारोह में पहुँचे।
समारोह में गधे को छोड़कर सभी आए थे। शेर ने केक काटा और सभी ने जन्मदिन का गीत गाया।
उसके बाद सभी ने दावत का मज़ा लिया। शेर को गधे के आने की पूरी उम्मीद थी, लेकिन वह नहीं आया। तब शेर ने सोचा।
कहीं वह जरूरी काम की वजह से नहीं आया होगा। अगले दिन जब शेर गधे से मिला तो उसने गधे से इस बारे में पूछा। गधा बोला, मुझे समारोह आदि में जाना अच्छा नहीं लगता है।
मुझे घर पर रहकर आराम करना ज्यादा पंसद है। गधे ने शेर से सच ही कहा था, जो कि कड़वा था। गधे की बात सुनकर शेर को बहुत गुस्सा आया और उसने गधे को जंगल से बाहर निकाल दिया।
उसकी यह दशा कड़वा सच कहने के कारण हुई। किसी ने ठीक ही कहा है कि सच हमेशा कड़वा होता है।
 
7. अपनी मदद खुद ही करते हैं – Story in Hindi
एक बार एक अमीर व्यापारी व्यापार के उद्देश्य से पानी के जहाज से अपने शहर से दूसरे शहर जा रहा था। वह अपने साथ कीमती सोने के सिक्कों से भरा एक संदूक भी ले जा रहा था।
रास्ते में तूफान आ गया। जहाज इधर-उधर हिलोरें लेने लगा। कुछ घंटों के बाद तूफान तो थम गया, लेकिन जहाज में एक छेद हो गया। अब जहाज में पानी भरने लगा।
यह देखकर कुछ लोग जहाज में ही डूब गए और कुछ तैरकर किनारे पहुँच गए। यह देखकर व्यापारी ने प्रार्थना की, हे भगवान मेरा जीवन बचा लो।
एक आदमी व्यापारी के पास गया और बोला, कूदो और तैरकर समुद्र के किनारे पहुँचो। भगवान उसकी मदद करता है जो अपनी मदद खुद करते है, लेकिन व्यापारी ने उसकी एक न सुनी।
वह जहाज में ही रहा। थोड़ी देर में जहाज डूब गया और वह व्यापारी भी।
 
8. मुर्गी और बिल्ली – Hindi Story
एक समय की बात है एक बहुत चालाक मुर्गी थी। एक दिन वह बीमार पड़ गई। तभी एक बिल्ली उसे देखने आई।
उसके घर में घुसकर बिल्ली बोली, मेरी दोस्त, क्या हुआ तुम्हें ? क्या मैं तुम्हारी कोई मदद कर सकती हूँ ?
तुम्हें कुछ चाहिए हो तो बताओ, मैं ला दूँगी। मुर्गी ने बिल्ली की प्यार भरी बातें सुनीं। उसे खतरे का आभास हुआ। वह बोली, हाँ, बिलकुल।
मेरे लिए एक काम कर दो। यहाँ से चली जाओ। मैं बीमार हूँ और किसी अनचाहे मेहमान को बुलाकर कोई खतरा नहीं उठाना चाहती।
 
9. कमी ने बचाई जान – Hindi Story
एक बहुत बड़ा जंगल था। वहाँ पर अलग – अलग तरह के पेड़ थे, उन्हीं पेड़ों में एक ऐसा पेड़ भी था, जो देखने में भद्दा लगता था।
दूसरे पेड़ उसे छेड़ते हुए कहते, तुम बड़े भद्दे लगते हो। तुम्हें तो देखने का भी मन नहीं करता। हमको देखो हम कितने सुंदर दिखते हैं।
बेचारा पेड़ सोचने लगा, न जाने क्यों, भगवान ने मुझे इतना भद्दा बनाया है ?
एक दिन एक लकड़हारा वहाँ आया। उसने भद्दे पेड़ को देखकर सोचा, यह पेड़ मेरे किसी काम का नहीं है। इसका तना तो फूला हुआ है। मुझे सीधे तने वाले पेड़ चाहिए।
यह सोचकर लकड़हारे ने भद्दे पेड़ को छोड़कर आप-पास के बाकी सभी पेड़ काट डाले। अब वह पेड़ सोचने लगा, ईश्वर जो करता है अच्छे के लिए करता है। मेरे भद्देपन ने आज मुझे बचा लिया।
 
10. बेवकूफ दोस्त – हिन्दी कहानियाँ

चूहा और मेंढक बड़े अच्छे दोस्त थे। वे अपना समय एक दूसरे के साथ बिताते थे।
जब चूहा खाने की तलाश में जाता तो मेंढक उदास हो जाता और उसे उसकी कमी महसूस होती।
इसी तरह जब मेंढक तालाब में जाता तो चूहे को उसकी बहुत याद आती। इसलिए उन्होंने एक योजना बनाई।
उन्होंने एक रस्सी ली और उसका एक किनारा मेंढक के पैर से बाँध दिया और दूसरा किनारा चूहे के पैर से बाँधा।
अब जब भी उन्हें एक-दूसरे की कमी महसूस होती, वे रस्सी खींच लेते। इससे दूसरा दोस्त इशारा समझकर तुरंत आ जाता।
एक दिन मेंढक खाने की तलाश में पानी के अन्दर गया।
वह भूल गया था कि उसका पैर चूहे के पैर के साथ बँधा हुआ है। वह पानी में बहुत अंदर तक चला गया, बेचारा चूहा भी पानी के अन्दर खिंचा चला गया और डूबकर मर गया।
तभी एक बाज ने मरे हुए चूहे को देखा। उसको खाने के लिए नीचे आया और अपनी चोंच में चूहे को दबाकर उड़ गया।
बाज ने देखा कि चूहे के साथ मेंढक भी है। फिर उसने दोनों को खा लिया। इस तरह अपनी बेवकूफी के कारण दोनों दोस्त मारे गए।