दक्षिण भारत की लोकप्रिय हिन्दी कहानियाँ – सुनहरा पंख | Hindi Story – Golden Wings

दक्षिण भारत की लोकप्रिय हिन्दी कहानियाँ – सुनहरा पंख | Hindi Story – Golden Wings

समुद्र किनारे मछुआरों की एक बस्ती थी। दिन में मछली पकड़ने के लिए वह सभी मछुआरे समुद्र में चले जाया करते थे। पीछे से उनके बच्चे तट के आसपास लगे पेड़ों के नीचे खेलते रहते। वह लहरों के साथ आई सीपियों से माला बनाकर अपने घरों को सजाते थे।

गांव के बाहर टीले पर नारियल का एक बड़ा पेड़ था। गांव वासियों का विश्वास था कि पहले यहां कोई देवता स्वर्ग से आकर तपस्या करता था। उसी स्थान पर यह पेड़ उगा था। इसलिए सब उसे देवता कहते थे।

साल में विशेष अवसरो मे सभी मछुआरे एकत्र होकर उत्सव मनाते थे। उसी दिन वह दैवीय शक्ति वाले उस नारियल के वृक्ष को सुंदर सुंदर उपहार भेंट करते। लड़कियां उसकी आरती उतारती, मंगलगान के बाद, गांव के हर परिवार का मुखिया कपड़े से ढक कर कोई चीज उस नारियल के पेड़ को भेंट करता। उनकी मान्यता थी कि दूसरों की नजर लगने से उपहार दूषित हो सकता है।

शाम को सभी उपहारों को बस्ती के सरदार के घर ले जाकर खोला जाता। जिसका उपहार सबसे सुंदर होता, उस दिन उस व्यक्ति की हर इच्छा पूरी की जाती थी।

इस बस्ती में सोमैया नाम का एक गरीब मछुआरा रहता था। उसके परिवार में उसकी पत्नी के अतिरिक्त एक पुत्र भी था। पुत्र का नाम राहुल था, राहुल की शक्ल सूरत से सुंदर ना था और लेकिन वह दिल का बहुत ही साफ था। जब वह छोटा था तो अन्य बच्चे उसे चढ़ाया करते लेकिन सरदार की लड़की पूजा को राहुल की मीठी-मीठी बातें बहुत अच्छी लगती थी।

एक बार बस्ती में उत्सव मनाया जा रहा था। सभी लोग अपने-अपने भेंट लेकर नारियल के पेड़ के पास आए, पर सोमैया सुबह से बुखार में तड़प रहा था, इसलिए उसकी पत्नी और पुत्र उसकी सेवा में लीन थे। उन्हें ध्यान ही नहीं रहा कि आज त्योहार का दिन है। बाकी सब लोग अपने उपहार नारियल के पेड़ मे भेंट कर अपने अपने घर लौट गए थे। अगले दिन गांव में चर्चा फैल गई की सोमैया ने नारियल के पेड़ का अपमान किया है और इस वजह से गांव पर भारी विपत्ति आएगी।

रात को सोमैया की तबीयत और खराब हो गई, बस्ती के हकीम ने दवा दी, पर कोई लाभ ना हुआ। सुबह तक सोमैया बेहोश रहा। अचानक जोरों की बारिश शुरू हो गई, तेज हवा के कारण समुद्र की ऊंची ऊंची लहरें उठने लगी। कुछ ही देर में वह बस्ती के घरों तक पहुंच गई। सबको विश्वास हो गया कि आज जरूर कुछ अशुभ होगा। तभी बस्ती के सरदार ने घोषणा की – “भाइयों यह सब देवता का अपमान करने के कारण हुआ है। अपमान क्योंकि सिर्फ एक परिवार ने किया है, इसलिए इसकी सजा भी उस परिवार के लोगों को ही मिलनी चाहिए। मेरी इच्छा है कि राहुल अपनी नौका लेकर समुद्र में जाए, यदि देवताओ को इसे दंड देना होगा, तो वह उसे सागर में डूबा देंगे। राहुल समुद्र में नहीं जाएगा, तो देवता का क्रोध पूरे गांव को नष्ट कर देगा।”

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समुद्र में उठती लहरों को देख राहुल की मां रोने लगी। उसने कहा – “भला इस तूफान में राहुल कैसे बच पाएगा?”

पर गांव का कोई भी व्यक्ति उसकी बात सुनने को तैयार ना था। उन्होंने जबरदस्ती राहुल को पकड़कर नाव में बैठाया और नाव को समुद्र में धकेल दिया। देखते-देखते नौका समुद्र की लहरों से टकराने लगी और आगे बढ़ने लगी। कुछ ही देर में वह काफी दूर निकल गई, वहां मौजूद सभी लोग अब अपने घर लौट आए।

राहुल की नाव समुद्र की तेज लहरों के थपेड़े खाती आगे बढ़ती जा रही थी। राहुल को अपनी मृत्यु स्पष्ट दिखाई देने लगी। डर के मारे वह बेहोश होकर नौका में ही गिर गया। अगले दिन जब उसे होश आया तो उसने देखा कि उसकी नाव टापू के किनारे चट्टानों के बीच उलझी हुई है। राहुल समझ गया इतनी तेज लहरों में वह कैसे बच गया है?

उसे भूख लग रही थी, वह नौका से उतर कर टापू पर आ गया। सामने एक शिला पर बैठकर अपने माता-पिता के बारे में सोचने लगा। तभी उसकी नजर पेड़ के नीचे गिरे हुए एक सुनहरे पंख की ओर गई। राहुल ने पंख को उठा लिया। कुछ देर बाद अचानक उसे पंख फड़फड़ाने की आवाज सुनाई दी।

राहुल ने देखा एक विशालकाय सुनहरा पंछी आकर उसी पेड़ पर बैठा है, राहुल समझ गया यह पंख इसी पंछी का है। वह छिपकर देखता रहा, पेड़ पर घने पत्तों के बीच सुनहरे पंछी का घोंसला था। पंखों की फड़फड़ाने की आहट सुन घोंसले में चू-चू की आवाज आई, राहुल समझ गया, जरूर यहां सुनहरे पंछी का बच्चा है।

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पंछी ने अपने चोंच से बच्चे को चुग्गा दिया और वह पुनः भोजन की तलाश में उड़ गया। पंछी की सुंदरता पर मुग्ध राहुल अपने सारे कष्ट भूल गया। वह उसके फिर से आने की प्रतीक्षा करने लगा। उसकी नजर अब भी घोंसले की ओर थी, अचानक एक काला नाग पेड़ की टहनियों पर रेंगता नजर आया।

राहुल को समझने मे देर ना लगी कि यह सुनहरे पंछी के बच्चे को खाने की तैयारी में है। बिना ज्यादा समय गवाएं, राहुल ने एक डंडा लेकर पेड़ पर चढ़ गया और धीरे-धीरे सांप की ओर बढ़ने लगा। सांप ने उसे अपनी ओर आते देखा तो क्रोध से फुकारने लगा। राहुल टहनी से चिपक गया और डंडे से सांप पर प्रहार किया। डंडे का वार बचा कर गुस्सैल सांप ने राहुल को काटने के लिए फन को फैला लिया। राहुल ने बिना डरे डंडे से उसे पीछे धकेल दिया और फुर्ती से उसके फन को दबोच लिया।

सांप गुस्से में भरकर राहुल के शरीर से लिपट गया, काफी देर तक दोनों का युद्ध चलता रहा। तभी सुनहरा पंछी चोंच में भोजन दबाए हुए, वहां आ गया। उसे पूरी घटना समझते देर न लगी। अपनी चोंच और पंजों से उसने नाग को नोच डाला। घायल होकर नाग राहुल को छोड़ जमीन पर गिर पड़ा और मर गया।

पंछी ने राहुल से कहा – “इस टापू पर ढेरों मोती और कीमती पत्थर फैले पड़े हैं, तुम चाहो तो उन्हें अपनी नाव में रखकर अपने साथ ले जा सकते हो। मैं आसमान में उड़ कर तुम्हें रास्ता दिखा दूंगी। तुम मेरे पीछे-पीछे नाव चलाते रहना।”

“मुझे तो सबसे सुंदर यह पंख लगता है।” – कहते हुए राहुल ने पत्थर पर रखा सुनहरा पंख पंछी को दिखाया।

अपनी प्रशंसा सुनकर पंछी को बहुत खुशी हुई। उसने ढेरों मणि एवं मोतियों को, राहुल को भेंट के रूप में दिया। काफी दूर तक समुद्र में मार्ग भी दिखाया। मोतियों से भरी नाव लेकर राहुल घर लौटा, उसके आने की खबर सुन सारी बस्ती के लोग एकत्रित हो गए। सबने राहुल का दिल खोल कर स्वागत किया। राहुल की मां को विश्वास ही नहीं हो रहा था कि उसका बेटा जिंदा है। राहुल ने अपने पिता की आंखों पर सुनहरा पंख रख दिया, थोड़ी देर बाद सुमैया को होश आ गया। अगले दिन फिर से उत्सव का आयोजन हुआ, राहुल मोतियों से भरी थाली और सुनहरा पंख लेकर नारियल के पेड़ के पास पहुंचा, और उसे भेंट के रूप मे चढ़ा दिया। शाम को सरदार के घर सभी उपहारों को खोला गया। यह जानने के लिए कि किस का उपहार सबसे उत्तम है।

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सभी उपहारों को खोलने के बाद सबसे उत्तम उपहार राहुल के द्वारा भेंट किया गया था। वहां मौजूद सभी लोगों ने राहुल की जय-जय कार किया। सरदार ने राहुल से पूछा – “बोलो राहुल तुम्हारी क्या मनोकामना है?”

राहुल ने खुश होकर कहा -“मेरी इच्छा है कि मेरी शादी आपकी पुत्री पूजा के साथ हो जाए।”

सरदार ने खुशी-खुशी अपनी बेटी का विवाह राहुल के साथ कर दिया और दोनों पति पत्नी जीवन भर खुशी के साथ अपना जीवन बिताया।

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