एक तूफानी रात में घोड़े पर सवार, एक राजा अपना भेष बदले एक तंग से रास्ते से जा रहा था। भेष बदलकर स्वयं अपनी प्रजा का हाल-चाल जानना, उसका दस्तूर था।

उसके घोड़े का पीछा करते हुए डाकू भी चुपके-चुपके चले जा रहे थे। डाकू राजा के शानदार घोड़े पर हाथ साफ करना चाहते थे।

अचानक डाकुओं ने राजा को घेर लिया। राजा एक बार तो सकते में आ गया, मगर वह घबराया नहीं। वह बच निकलने की तरकीब सोच ही रहा था कि उसके घोड़े का खुर सड़क के गड्ढे में फस गया। डाकू, जो गिनती में एक दर्जन से अधिक थे और राजा पर लपकने ही वाले थे कि एक साथ छः नौजवान वहां आ पहुंचे। उन्होंने देखा कि राजा मुसीबत में है। उन्होंने डाकूओं पर हमला किया। पीछे से अचानक हमला हुआ तो डाकुओं का ध्यान बंट गया और इस प्रकार राजा बच निकला।

राजा जहां भी भेष बदलकर जाता था, उसके पीछे-पीछे, कुछ दूरी पर उसके कुछ चुने हुए अंगरक्षक भी रहते थे। तब तक अंगरक्षकों का दल भी वहां आ गया। सारे डाकू घेर लिए गए। एक भी बचकर न भाग सका। राजा उन नवयुवकों से प्रसन्न था, जिन्होंने बिना यह जाने कि वह एक राजा है, डाकुओं से उसकी रक्षा की थी। राजा ने उन्हें बहुत-बहुत धन्यवाद दिया और कहा कि वे उसके साथ महल तक चलें।

वे नवयुवक दूर-दूर के गाँवों से आकर एक सराय में ठहरे थे और वही उनकी मित्रता हुई थी।

भोर होते-होते राजा की घटना का समाचार सब जगह फैल गया। सारी प्रजा खुश थी कि डाकू उनके राजा का बाल भी बांका ना कर सके। राज्य परिवार के लोगों, मंत्रियों, दरबारियों और सारी जनता ने नवयुवकों के साहस की प्रशंसा की।

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अगले दिन दरबार में इन छः नौजवानों को राजा के सामने लाया गया। राजा ने अपने सिंहासन से उतरकर उन्हें गले से लगाया और मनचाहा पुरस्कार मांगने को कहा, – “आप बारी-बारी से जो चाहे मांगे। अगर मेरे बस से बाहर न हुआ तो मैं इसी समय आपकी कोई भी इच्छा पूरी करूंगा।”

उन छहो मे से जो सबसे बड़ा था, राजा ने पहले उसी से पूछा। एक पल के लिए उसने सोचा और फिर कहा, – “महाराज, बहुत दिनों से मेरी लालसा थी कि मेरे पास आराम से रहने के लिए एक घर हो। मुझे बस एक अच्छा-सा मकान चाहिए।”

राजा ने उसी समय उस नौजवान के लिए एक आलीशान भवन बनाने की आज्ञा दे दी।

अब दूसरे नौजवान की बारी थी। वह अपने पद में तरक्की चाहता था। उसको राजा ने राजदरबारी नियुक्त कर दिया और इस तरह उसकी इच्छा पूरी की।

तीसरे नवयुवक ने कहा, “सरकार, मेरे गाँव के लोग हर सप्ताह नगर में सब्जी-तरकारी बेचने आते हैं। गांव और शहर के बीच कोई अच्छी सड़क नहीं है, इसलिए उन्हें बड़ा कष्ट होता है, खासकर बरसात में। मेरी विनती है कि एक अच्छी सड़क बनवा दी जाए ताकि उनका कष्ट दूर हो।”

राजा ने उसी समय सड़क और पुलों का निर्माण कराने वाले मंत्री को हुक्म दिया कि फौरन सड़क बनाने का काम शुरू कर दिया जाए।

अब चौथे नौजवान से उसकी इच्छा पूछी गई तो वह शर्माते हुए बोला, “महाराज, आप मेरे पिता के समान है। मैं सुंदर पत्नी चाहता हूं।”

राजा के एक विदूषक की कन्या थी। राजा ने विदूषक से पूछा। उसने सहर्ष उस नौजवान को दामाद बनाना स्वीकार कर लिया। पांचवे नौजवान ने धन माँगा। उसी समय बोरों में सोना भरकर उसे दे दिया गया।

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अब छठे की बारी थी। उसने कहा, “महाराज! मेरी बस यही इच्छा है कि जब तक मैं या आप जीवित रहे, वर्ष में एक दिन आप मेरे यहाँ अतिथि बनकर आएं।”

इस अनोखी इच्छा को सुनकर सब हैरान रह गए। बहुत से लोगों ने तो नौजवान को मूर्ख समझा। स्वयं राजा को भी यह बड़ी अजीब-सी बात लगी कि नौजवान अपने लिए कुछ मांगने के बजाय उसी को अतिथि बनाना चाहता है, लेकिन उसने तो शुरू में ही कह दिया था कि जब तक उसके वश में होगा, वह उनकी इच्छा पूरी करेगा। बस फिर क्या था। वर्ष में एक दिन और एक रात राजा ने उस नवयुवक का अतिथि बनना स्वीकार कर लिया।

अब राज्य-सरकार के विभिन्न विभागों की जिम्मेदारी हो गई कि राजा जब नौजवान के घर जाए तो उनके दौरों का ठीक-ठाक प्रबंध हो। न राजा को किसी प्रकार का कष्ट हो और न उनके सेवकों और घोड़ों को। बढ़िया सड़क बनाना जरूरी था ताकि राजा का रथ आसानी से जा सके। फिर यह प्रश्न उठा कि राजा एक छोटे मकान में दिन और रात कैसे काटेंगे? कहाँ उठेंगे-बैठेंगे? कहाँ खाएंगे-पिएंगे? कहाँ सोएंगे? इसलिए राजसी ठाठ-बाट के लायक एक महल खड़ा करवाया गया लेकिन नौजवान अपनी मामूली सी आमदनी में इतने बड़े महल की देखरेख का खर्च कैसे चलाएगा? कैसे राजा और उसके संगी-साथियों की देखभाल करेगा? इसके लिए उसे बहुत सारा धन दिया गया। सरकारी खर्च पर नौकर-चाकर भी। पुरानी चली आने वाली प्रथा के अनुसार, राजा को उसे किसी दरबारी की पदवी भी देनी पड़ी। अब तो उसका उतना ही सम्मान होने लगा जितना किसी राजकुमार का होता।

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अभी एक और बात बाकी थी। जिस घर में राजा अतिथि बनकर ठहरेंगे, उसकी गृहणी को राजा के नाजुक मिजाज और पसंद का पता होना चाहिए। इस बात की जानकारी राजकुमारी से अधिक और किसे हो सकती थी? शीघ्र ही नवयुवक से राजकुमारी के विवाह की तैयारियां की जाने लगी।

इस तरह केवल एक वरदान मांग कर उस चतुर नौजवान ने वह सब कुछ एक साथ पा लिया, जो पांचों ने अलग-अलग मांगा था।

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