गीतांजली की कहानी- जादूगर बन गया राजा

एक जादूगर मंगलपुर नाम के राज्य का राजा बनना चाहता था। इसलिए उसने एक पहाड़ मे छुपकर कई वर्षो तक तपस्या की, उसकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान प्रकट हुये, और जादूगर को वरदान मागने को कहा। जादूगर ने भगवान से मंगलपुर का राज्य मांग लिया, उसने भगवान से कहा की आप मुझे मंगलपुर का राजा बना दो।

भगवान जानते थे की अगर इसे मंगलपुर का राजा बना दिया तो यह मंगलपुर के लोगो का जीना मुश्किल कर देगा। इस जादूगर के पास राजा बनने के कोई गुण नहीं हैं। इस लिए भगवान ने दिमाग लगाया और जादू से एक सेब का फल प्रकट किया। और जादूगर से बोले- जादूगर, निश्चित रूप से तुम मंगलपुर के राजा बनोगे, पर इसके लिए तुम्हें थोड़ा और परिश्रम करना होगा। ये फल लो और इसे आने वाली पुर्णिमा को आधी रात को खाना होगा, अगर तुम ने ऐसा किया तो तुम मंगलपुर के राजा बन जाओगे, और अगर तुम ऐसा नहीं कर पाये तो तुम राजा नहीं बन पाओगे।

पुर्णिमा अगले ही दिन था, जादूगर ने फल ले लिए और भगवान को प्रणाम कर के मंगलपुर के बाजार की ओर चल दिया। बाजार मे वह कुछ खाने के व्यवस्था कर रहा था, तभी एक बंदर उसके थैले से सेब का फल लेकर भाग गया। जादूगर ने उस बंदर का पीछा किया पर बंदर को पकड़ नहीं पाया। उसे बहुत गुस्सा आया, उसके राजा बनने का सपना टूटता हुआ दिख रहा था, इस लिए उसने सेब को श्राप दे कर श्रापित कर दिया, की जो भी उस सेब को खाएगा, वह चूहा बन जाएगा।

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बंदर सेब के फल को हाथो मे लिए एक छत से दूसरे छत कूद रहा था की तभी उसके हाथ से सेब गिर गया, उसी समय एक कुत्ता वही से गुजर रहा था, उसने उस सेब को उठा लिया और जाकर एक पुराने घर मे छिपा दिया। एक गिलहरी ने उस सेब को वहाँ से उठा लिया और एक पेड़ के टहनी मे छिपा दिया। पूर्णमासी की रात आ चुकी थी, जादूगर अब भी उस बंदर की तलास मे था। तभी उसने एक पेड़ देखा तो वह उस पेढ के नीचे बैठ गया, उसी समय गिलहरी का सेब खाने का मन हुआ और वह जैसे ही सेब को खाने का प्रयास किया तो वह उससे छट कर जादूगर के गोद मे गिर गया।

जादूगर ने उस सेब को पहचान लिया, यह वही दिव्य फल हैं जो भगवान ने उसे दिया था। पूर्णमासी की रात को वह कुछ चमक भी रहा था, वह यह फल पा कर बहुत ही खुश हुआ और खुशी के मारे उसने फल खा लिया। वह सेब के फल को दिये अपने श्राप को भूल गया था। फल खाने के तुरंत बाद ही वह चूहे मे बदल गया, क्यूंकी वह जादुई फल खाया था, इस लिए चूहा बनने के बाद वह चमक रहा था, वही से चूहो की मंडली जा रही थी, उन्होने उस चमकीले चूहे को देखा, तो उसे कोई विशेष चूहा मानकर उसे अपना राजा बना लिया, इस तरह से भगवान के वरदान के अनुसार मंगलपुर मे रहने वाले सभी चूहो का वह राजा  बन गया।

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इस तरह से भगवान ने मंगलपुर के लोगो को जादूगर से बचा लिया तथा उसे उसकी इच्छा के अनुसार उसे मंगलपुर का राजा भी बना दिया।