गीतांजली की कहानी – पिंकू और टिंकू, दो दोस्त

गीतांजली की कहानी – पिंकू और टिंकू, दो दोस्त

पिंकू और टिंकू गहरे दोस्त थे दोनों हर बात एक दूसरे से बताया करते थे। दोनों अपनी अपनी दिनचर्या एक दूसरे से साझा करते थे। दोनों के घर की दूरी एक किलोमीटर के अंतर की थी । टिंकू से मिल कर एक दिन पिंकू घर जा रहा था तभी रास्ते मे उसे एक साधू बाबा मिले उन्होने पिंकू को कहा बेटा क्या नाम है तुम्हारा।

पिंकू बोला -“पिंकू नाम है बाबा” साधू बोला -“अच्छा बेटा कहाँ से आ रहे हो?”

पिंकू ने कहा =”बाबा मै अपने दोस्त टिंकू से मिल कर आ रहा हूँ।”

“अच्छा बेटा” फिर साधू ने कहा – “बेटा तुम्हारी किस्मत मे लिखा है की तुम्हें धन प्राप्त होने वाला है।”

पिंकू को साधू की बातों पर भरोसा नहीं हुआ, पिंकू कुछ कहे बिना वहाँ से चल दिया थोड़ी देर मे उसका घर आ गया।

पिंकू ने अपनी माँ से खाना मांगा, खाना खा कर थोड़ी देर तक टहला। आज पिंकू का मन पढ़ने मे नहीं लगा था, इसलिए पिंकू ने अपनी किताबों को बैग मे फिर से डाल कर सो गया। सुबह पिंकू उठ कर अपनी सुबह की सारी नृत्य क्रिया कर के तैयार हो कर खाना खाया और खाने का डिब्बा लेकर स्कूल चला गया ।

रास्ते मे उसे टिंकू मिला दोनों बाते करते-करते स्कूल पहुच गए एसे करते-करते चार दिन बीत गए पंचवे दिन फिर घर जाते समय वह साधू उसे मिला । साधू इस बार पिंकू का नाम जनता था। साधू ने पिंकू को देखते ही बोल पड़ा पिंकू तुम्हें धन मिलने वाला है। तुम मेरी बात ध्यान से सुनो तुम्हें क्या करना है।

पिंकू को लग रहा था यह ढोंगी है इस लिए पिंकू ने उससे बिना कुछ कहे आगे बढ़ गया। आज रात को पिंकू को सोते समय उसी साधू का सपना आया कि तुम्हें धन मिलने वाला है। पिंकू जग गया, रात के दो बजे थे। अब पूरी रात उसे नीद नहीं आई। वह सोने का प्रयास करता रहा। सुबह हो गई पिंकू ने बिस्तर छोड़ दिया, आज पिंकू का मन अशांत था। पिंकू बिना मन के स्कूल जाने को तैयार हुआ, रह-रह कर उसे रात का सपना याद आ रहा था।

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पिंकू स्कूल मे जब टिंकू से मिला तो उसने रात का सपना और साधू के द्वारा कही गई बात बताई, टिंकू थोड़ा लालची स्वभाव का था उसने पिंकू से कहा – “अरे ये तो बहुत ही अच्छी बात है। तुम आज उस साधू से मिलो और उपाय पूछो”

पिंकू को लगा कि शायद टिंकू ठीक कह रहा है। एक बार साधू बाबा से मिल लेता हूँ आखिर वह सच कह रहा है या छूठ पता चल जाएगा। आज पिंकू स्कूल से वापस आते समय उसी जगह मे रुक कर चारो तरफ देखने लगा पर पिंकू को साधू कहीं नजर नहीं आया ।

थोंड़ी देर रुकने के बाद पिंकू घर की और चल दिया जैसे ही आगे की तरफ पिंकू चलना प्रारंभ किया, पीछे से आवाज आई -“रुको बेटा तुम मुझे ढूंढ रहे हो।” पिंकू पीछे की तरफ देखा तो वही साधू बाबा थे । पिंकू ने कहा -“हा बाबा मै आप ही को ढ़ूढ़ रहा था।”

बाबा मुस्कुरा कर बोले -“क्यो बेटा अभी तो तुम्हें मेरी बातों पर भरोसा नहीं था अब अचानक कैसे?” पिंकू ने कहा -“हाँ बाबा आप सही कह रहे हैं। पर मेरे दोस्त ने मुझे समझाया की एक बार आप की बातों मे यकीन करना चाहिए।”

“अच्छा तो दोस्त ने बोला हैं” बाबा ने पिंकू से आगे कहा -“पर कोई बात नहीं दोस्त के कहने पर हीं सही तुम्हें मुझ पर भरोसा तो हुआ। अब मेरी बात ध्यान से सुनो तुम्हें क्या करना हैं। सुबह चार बजे उठ कर स्नान करना हैं फिर सीधे तुम्हें शिव मंदिर के सामने जो नीम का वृक्ष हैं उसके नीचे दाहिनी ओर खुदाई करनी है। खुदाई मे तुम्हें एक सोने से भरा मटका मिलेगा मटके के अंदर सोने चांदी से जड़े आभूषण सिक्के वर्तन हीरा मोती सब होगा। बस एक काम करना की जब तुम जा रहे हो और पीछे से कोई आवाज दे तो तुम मूड कर मत देखना अब जाओ।”

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पिंकू ने सोचा की यह बात मुझे टिंकू को बतानी चाहिए। घर जाने की बजाय पिंकू टिंकू से मिलने उसके घर पहुच गया। पिंकू सारी बात टिंकू को बतादी, अब टिंकू मन हीं मन चिड़ गया पर दिखाबे मे बोला यह तो बहुत ही अच्छी बात हैं। तुम वैसे ही करना जैसे साधू बाबा ने बताया है।

पिंकू चला गया इधर टिंकू ने सोचा की अगर पिंकू को धन मिल जाएगा तो वह अमीर हो जायगा फिर वह मुझसे दोस्ती तोड़ कर अमीरो को अपना दोस्त बना लेगा। पिंकू ने टिंकू को पीछे देखने वाली बात भी बताई थी। अब टिंकू ने सोचा कोई बात नहीं जब पिंकू सुबह खुदाई करने जाएगा तब मै पीछे से उसे आवाज लगा दूगा, जब वह मेरी आवाज सुनेगा तो जरूर पीछे देखेगा ।

और उसे धन नहीं मिलेगा फिर हमारी दोस्ती बनी रहेगी। सुबह चार बजे पिंकू को जैसा साधू बाबा ने बताया था। पिंकू ठीक वैसे ही किया पिकू नीम के पेंड के पास पहुचने ही वाला था तभी पीछे से टिंकू ने आवाज लगा दी पहले तो पिंकू पीछे देखने हीं वाला था की उसे साधू की बात याद आ गई। बिना पीछे देखे पिंकू आगे की ओर बढ़ गया, नीम के पास पहुँच कर उसने एक कुदारी उठाई और खुदाई करना शुरू कर दिया।

थोड़ा सा खोदने के बाद उसे एक मटका दिखा पिंकू हैरान रह गया। पिंकू ने मटके को बाहर निकाल कर देखा तो उसमे सचमुच बहुत सा हीरा जवाहरात था। पिंकू दंग रह गया, क्योकि कही ना कही उसे यही लग रहा था की साधू सच बोला भी है या नहीं। पिंकू ने उस धन का, दो भाग किया। एक भाग टिंकू को दिया एक भाग खुद रख लिया, टिंकू ने पिंकू के ऊपर जो शंका करने की गलती की थी उसके लिए उसने  माफी मागी और दोनों खुशी-खुशी रहने लगे ।

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पिंकू अपने हिस्से के पैसे से गरीब लोगो की मदद करता था।