एक बार की बात है, शैदुल्लाह नाम का एक व्यक्ति था। वह बड़ा ही आलसी और निकम्मा था। वह कुछ भी करना ही नहीं चाहता था। हर समय बस काम से जी चुराता रहता था। उसकी पत्नी और बच्चे भी कितनी ही बार भूखे रह जाते थे लेकिन उसके ऊपर कोई असर नहीं होता था।

कई बाद शैदुल्लाह की पत्नी उसे डांटती फटकारती थी और कोसते हुए कहा करती थी- “तुम बहुत ज्यादा आलसी हो गए हो! तुम कुछ काम-धन्धा क्यों नहीं करते?”

लेकिन उसके जवाब में शैदुल्लाह सिर्फ इतना ही कहता था, “मुझे काम करने की कोई जरूरत नहीं है। थोड़ा-सा इन्तजार करो और फिर देखना कि बिना कुछ किये ही मैं एक दिन किस प्रकार अमीर बन जाऊंगा। सब लोग हैरत में रह जाएंगे।”

उसकी पत्नी उसे समझाते-समझाते थक गई थी कि बिना मेहनत और लगन के कोई अमीर नहीं बनता। इस पर शैदुल्लाह ने कहा कि वह किसी अक्लमन्द आदमी से मिलकर पूछेगा कि वह एक दिन में किस तरह अमीर बन सकता है। इसलिए वह एक ऐसे अक्लमन्द व्यक्ति की तलाश में निकल पड़ा जो उसे सलाह दे सके।

चलते-चलते रास्ते मे उसे एक भेड़िया मिला।

“श्रीमान जी, क्या आप मुझे बता सकते हैं कि आप इस समय कहां जा रहे हैं।” भेड़िये ने शैदुल्लाह को रोककर पूछा।

शैदुल्लाह ने जवाब दिया- “मैं किसी अक्लमंद आदमी के तलाश में जा रहा हूं, जो मुझे धनी होने का उपाय बता सके, जिससे कि मैं रातों-रात अमीर बन जाऊं।”

“शायद वह अक्लमंद आदमी मेरी भी कुछ मदद कर दे।” भेड़िये ने कहा- “मैं पिछले दो सालों से अपने पेट के दर्द से परेशान हो रहा हूं। अगर वह अक्लमन्द आदमी तुम्हें मिल जाए तो तुम उससे पूछना कि मैं किस तरह ठीक हो सकता हूँ।

“मैं जरूर पूछेगा।” शैदुल्लाह बोला।

उसके पश्चात् शैदुल्लाह तीन दिन और तीन रात बराबर चलता रहा। तब उसे एक सेब का पेड़ दिखाई दिया- “श्रीमान जी! आप कहां जा रहे हैं।” सेब के पेड़ ने पूछा।

“भाई, मैं किसी अक्लमन्द आदमी की तलाश में जा रहा हूं, जो मुझे अमीर बनने का उपाय बता सके। ताकि मैं रातों-रात अमीर बन जाऊं और लोग मुझे देखकर हैरत करें कि मैं इतना अमीर कैसे बन गया…, किस प्रकार बन गया।” उसने बताया।

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“जिस आदमी की तलाश में तुम जा रहे हो, शायद वह अक्लमन्द आदमी मेरी भी कुछ मदद कर सके।” सेब के पेड़ ने कहा।

“क्यों भाई, तुम्हें क्या कष्ट है?” शैदुल्लाह ने पूछा।

“भाई, हर साल मेरी डालियों में फूल खिलते हैं लेकिन फल बनने से पहले ही वे मुरझाकर गिर जाते हैं। बुद्धिमान व्यक्ति से पूछना कि मुझमें फल कैसे आ सकते हैं।”

“ठीक है भाई, मैं जरूर पूछ लूंगा।” शैदुल्लाह ने कहां।

फिर वह तीन दिन और तीन रात चलता रहा। तब वह एक झील के किनारे पहुंचा। वहां एक मछली ने पानी से बाहर अपना मुंह निकाला और शैदुल्लाह को देखकर कहने लगी- “श्रीमान जी! आप कहां जा रहे हैं, क्या मुझे बताने का कष्ट करेंगे?”

मैं किसी अक्लमन्द आदमी की तलाश में जा रहा हूं, जो मुझे धनी होने का उपाय बता सके, ताकि मैं रातों-रात अमीर बन जाऊं और लोग हैरान हो जाएं।”

“शायद वह अक्लमन्द आदमी मेरी भी कुछ मदद कर सके। अगर वह तुम्हें मिल जाए तो मेरे बारे में पूछ लेना।” मछली बोली।

“क्यों, तुम्हें क्या कष्ट है?” शैदुल्लाह ने पूछा।

“भाई, मैं पिछले दो सालों से अपने गले के दर्द से तड़प रही हूं। कृपया उससे पूछना कि मैं किस प्रकार ठीक हो सकती हूं।” मछली में अपनी परेशानी बतायी।

“ठीक है बहन, मैं उस व्यक्ति से तुम्हारे दुख के बारे में जरूर पछ लूंगा।” शैदुल्लाह ने कहा।

फिर वह तीन दिन और तीन रातें बराबर चलता रहा। इस बार उसे एक बूढ़ा आदमी मिला।

“शैदुल्लाह, तुम्हें क्या परेशानी है? तुम क्या चाहते हो?” उस बूढ़े आदमी ने पूछा।

उसके इस प्रकार पूछने पर शैदुल्लाह को बहुत हैरानी हुई। उसने पूछा- “आपको मेरा नाम किस तरह मालूम हुआ?”

“मैं तुम्हें अच्छी प्रकार जानता हूं क्योंकि मैं वहीं अक्लमन्द आदमी हूं जिसकी तुम्हें तलाश है और उसे तलाश करते हुए तुम यहां तक आए हो।” बूढ़े ने कहा।

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बूढ़े की बात सुनकर शैदुल्लाह बहुत खुश हुआ। उसने उसे बताया कि वह वहां क्यों आया था। उसने उसे भेड़िये, सेब के पेड़ और मछली क बारे में भी बताया।

“मेरी एक बात ध्याने से सुनो।” बुद्धिमान आदमी ने कहा- उस मछली के गले में एक बहुत बड़ा मोती फंसा हुआ है। अगर वह निकाल दिया जाए तो वह ठीक हो जाएगी।

“जहाँ तक सेब के पेड़ की बात है-उसके नीचे मिट्टी में सोने का एक कलश दबा हआ है। उस कलश को निकाल देने से उस पर फल लगने शुरू हो जाएंगे।

“जहाँ तक भेड़िये का सवाल है तो अगर वह सबसे पहले मिलने वाले आलसी आदमी को मारकर खा जाए तो वह हमेशा के लिए इस से मुक्त हो जाएगा।”

“और श्रीमान जी, आपने मेरे बारे में क्या सोचा है?” शैदुल्लाह ने पूछा।

“जो तुम मुझसे चाहते थे वह तुम्हें मैं पहले ही दे चुका हूं।” गुणी आदमी ने कहा- “अब तुम निश्चिंत होकर अपने घर जा सकते हो। जो तुम चाहते वो तुम्हें मिल जायेगा।”

शैदुल्लाह बहुत खुश हुआ, उसने बूढ़े आदमी का शुक्रिया अदा किया और घर की तरफ चल दिया। जल्दी ही वह झील के किनारे पहंच गया।

मछली ने पूछा- “क्या अक्लमन्द व्यक्ति ने तुम्हें मेरे बारे में कुछ बताया।”

“हां…।” शैदुल्लाह ने कहा- “उसने बताया है एक मोती तुम्हारे गले में अटका हुआ है। अगर उसे निकाल दिया जाए तो तुम ठीक हो जाओगी।”

“कृपया तुम उस मोती को निकाल दो।” मछली ने कहा- “वह मोती तुम ही रख लेना।”

“मैं तुम्हारे लिए क्यों परेशान होऊं?” वह बोला- “मैं तो बिना कुछ किये ही अमीर बनना चाहता हूं।”

तब वह आगे बढ़ा तो सेब का पेड़ मिला।

“क्या बुद्धिमान व्यक्ति ने तुम्हें मेरे बारे में कुछ बताया है?” उसने पूछा।

“हां, बताया है।” उसने कहा- “तुम्हारी जड़ों के पास मिट्टी में एक सोने का कलश दबाया गया है। अगर उसे बाहर निकाल दिया जाए तो तुम ठीक हो जाओगे।”

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“सुनो भाई, तमु उस खजाने को निकाल दो और सारा सोना तुम ही रख लेना।” पेड़ ने कहा।

“मैं तुम्हारी वजह से बिल्कुल परेशान नहीं हो सकता।” वह बोला- “मैं तो कुछ किये बिना ही अमीर बनना चाहता हूं।”

तब वह आगे बढ़ा तो भेड़िया मिला।

“क्या अक्लमन्द व्यक्ति ने तुम्हें मेरे बारे में कुछ बताया?” भेड़िये ने प्रश्न किया।

“हां, हां, बताया है। शैदुल्लाह ने कहा- “जो तुम्हें सबसे पहला आलसी मिले, तुम उसे खा जाओ। तुम हमेशा-हमेशा के लिए ठीक हो जाओगे।”

भेड़िया सुनकर बड़ा खुश हुआ। उसने शैदुल्लाह से पूछा- “जरा मुझे यह तो बताओ कि तुमने रास्ते में क्या-क्या देखा, क्या-क्या सुना?”

शैदुल्लाह ने उसे मछली और पेड़ के बारे में बता दिया। उसने कहा- “मैं उनके लिए भला क्यों परेशान होता? मैं तो बिना कुछ किये ही अमीर बनना चाहता हूं।”

भेड़िये को सारी बात सुनकर बड़ी हैरानी हुई। उसने मन-ही-मन सोचा- “इससे ज्यादा आलसी और कौन हो सकता है।” इसलिए एक ही पल में भेड़िया उस पर टूट पड़ा और मारकर खा गया।”

प्यारे बच्चों! इस कहानी से हमें शिक्षा मिलती है कि हर व्यक्ति को मेहनत और लगन से कार्य करना चाहिए। आलसी व्यक्ति कभी भी धनवान नहीं बन सकता। वह हमेशा निधनतारा घिरा रहता है।

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