अख़बार बेचने वाला एक लड़का जिसकी उम्र 10 वर्ष थी वह एक मकान के गेट पर खड़ा होकर उस घर के गेट मे लगी घंटी का बटन दबा रहा है।

मालकिन डोरवेल सुनकर बाहर आकर लड़के से पूछी – “क्या है ?”

लड़के ने मालकिन से कहा – नमस्ते आंटी, क्या मैं आपके बगीचे को साफ कर दूं ?

मालकिन ने चिढ़ते हुये कहा – नहीं, हमें नहीं बगीचे को साफ नहीं करवाना है, और आज का अखबार कहा हैं?

लड़के ने हाथ जोड़ते हुए दयनीय स्वर में कहा- “प्लीज आंटी जी, बगीचे को साफ करा लीजिये न, मैं अच्छे से साफ कर दूंगा, आज समाचारपत्र नहीं छपा हैं क्यो की कल छुट्टी थी।”

मालकिन दुखी होते हुए कहा- “अच्छा चलो ठीक है, पर बगीचे साफ करने का कितने रूपय लेगा ?”

लड़के ने कहा – पैसा नहीं लूँगा आंटी जी, बगीचा साफ करने के बदले आप खाना दे देना।”

मालकिन- ठीक हैं, अंदर आ जाओ और बगीचे को अच्छे से साफ करना। (“बेचारा लड़का लगता हैं बहुत भूखा है, पहले मैं इसे खाना दे देती हूँ, बाद मे बगीचा साफ करता रहेगा।” -मालकिन बुदबुदायी)

मालकिन ने लड़के के बुलाते हुये कहा- सुनो लड़के, तुम पहले खाना खा लो, इसके बाद बगीचा साफ करना ।

लड़के ने कहा – “नहीं आंटी जी, मैं सबसे पहले बगीचे को साफ करूंगा इसके बाद ही आप खाना दे देना।”

मालकिन ने यह सुन कर उसे बगीचे मे ले गईं और काम समझा कर अपने काम मे लग गई, लड़का भी बगीचे की सफाई करने लगा।
एक घंटे बाद लड़के ने मालकिन से कहा- “आंटी जी, मैंने बगीचे को साफ कर दिया हैं, आप एक बार देख लीजिए की मेरे द्वारा सफाई अच्छे से हुई हैं कि नहीं।

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मालकिन ने बगीचा देख कर कहा – अरे वाह! तुमने तो बहुत ही अच्छे से सफाई की है, गमले को अच्छे से जमा दिया हैं तुमने। आओ यहां बैठो, और मैं तेरे लिए खाना लेकर आती हूँ।

मालकिन घर के अंदर से खाना लेकर आई और लड़के को खाने के लिए दिया। लड़के ने जेब से एक पन्नी निकाली और उसमे खाना रखने लगा। यह देख कर मालकिन लड़के से कहा की – “तूने बहुत मेहनत से काम किया हैं तो यही पोर्च के नीचे बैठ कर पंखे की हवा मे खाना खा ले। खाना कम लगेगा तो और खाना दे दूँगी। “

लड़क ने कहा – “नहीं आंटी, मेरी माँ बीमार हैं, सरकारी अस्पताल से तो दवा मिल गयी है, पर डाक्टर ने कहा है की दवाई खाली पेट नहीं खाना है।”

यह सुन कर मालकिन की आंखो मे आसू आ गए और अपने हाथों से उस मासूम लड़के को उसकी दूसरी माँ बनकर अपने हाथो से खाना खिलाया फिर उसकी माँ के लिए रोटियां और सब्जी एक पन्नी मे बांध कर उस लड़के को दे दिया, साथ मे कुछ पैसे भी दिये। और लड़के के साथ खुद उसे घर गई।

और लड़के की माँ से बोली – “बहन आप बहुत अमीर हो, जो दौलत आपने अपने बेटे को दी है, वो हम अपने बच्चों को नहीं दे पाते हैं” ।

यह सुन वह गरीब माँ अपने बेटे की तरफ डबडबाई आंखों से देखे जा रही थी।

बेटा बीमार मां से लिपट गया।

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