यह hindi story एक शिक्षक जिसे अतिथि के रूप मे नियुक्त कियागा हैं। जो सरकारी स्कूल मे तो पढ़ा रहा हैं, पर उसकी वैल्यू चपरासी से भी कम हैं। यह hindi story पसंद आने पर कहानी को शेयर जरूर करे।

एक बार एक नगर में अक्षय कुमार नाम का एक अतिथि शिक्षक रहता था। वह बहुत ही ईमानदार और सीधा साधा था। नगर के एक सरकारी स्कूल मे वह अतिथि शिक्षक के रूप में कार्य करने लगा था। उसका घर किसी तरह से चल रहा था। पढ़ाने के बाद उसे जो पैसा मिलता था। वह घर चलाने के लिए बहुत सीमित था। इसलिए उसने पढ़ाई के साथ साथ एक दूसरा व्यवसाय चालू कर दिया, जिसकी वजह से उसका दिमाग अब बट गया था। जब तक वह सिर्फ स्कूल मे पढ़ाया करता था, तब तक उसके विषयों को बच्चे आसानी से समझ लिया करते थे, लेकिन धीरे-धीरे जब अक्षय कुमार को पैसों की ज्यादा जरूरत महसूस होने लगी और अतिथि शिक्षक की नौकरी बस से उसका घर नहीं चलने वाला था। यह बात उसको समझ आई तो उसने एक व्यवसाय प्रारंभ कर दिया था। जब तक वह कॉलेज में होता उसका भाई या फिर उसकी पत्नी उस व्यवसाय की देखरेख करते, कॉलेज से आने के बाद वे स्वयं अपने उस व्यवसाय पर ध्यान देने लगता। शहर के उस स्कूल में वह अकेला अतिथि शिक्षक नहीं था, वहां पर लगभग 20 अतिथि शिक्षक कार्यरत थे और सभी बाल बच्चे वाले थे, इसलिए सभी को आर्थिक मजबूती की आवश्यकता महसूस हो रही थी और इसीलिए लगभग सभी अतिथि विद्वान कोई ना कोई अन्य धंधा-व्यापार भी कर रहे थे। एक बार शहर में नए कलेक्टर साहब ट्रांसफर होकर आए थे। यह उनका कलेक्टर के रूप में पहला शहर था। नए नए कलेक्टर बने थे, इसलिए रोज किसी न किसी दफ्तर या विभाग में औचक निरीक्षण के लिए पहुंच जाया करते थे। एक दिन वह नगर के उस स्कूल में औचक निरीक्षण के लिए पहुंच गए, उसी समय अक्षय कुमार 9वीं कक्षा  मे इतिहास पढ़ा रहे थे। कलेक्टर साहब खिड़की की ओट लेकर वहीं पर खड़े हो गए और सुनने का प्रयास किया की अक्षय कुमार नाम के अतिथि शिक्षक क्या पढ़ा रहे हैं। उन्होंने देखा और सुना की इतिहास और भूगोल के कुछ तथ्य अक्षय कुमार जी ने इधर-उधर कर दिए। कलेक्टर साहब का मन हो रहा था कि अभी वह कक्षा में पहुंच कर अक्षय कुमार को टोके। परंतु कुछ मर्यादाओं के चलते उन्होंने अक्षय कुमार को प्रिंसिपल ऑफिस बुलाकर उनसे पूछा कि क्यों मास्टर जी कक्षा में आप बच्चों को क्या गलत-सलत पढ़ा रहे थे। गंगा नदी अरब की खाड़ी में कब से गिरने लगी?

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उस समय उस स्कूल के सभी टीचिंग स्टाफ वहां पर मौजूद थे। अक्षय जी ने बिना देर किए हुए कलेक्टर महोदय को जवाब दिया की – “महाराज जिस प्रकार का वेतन हमें मिलता है, उस प्रकार के वेतन में गंगा बंगाल की खाड़ी में नहीं गिर पाएगी, उसको अरब सागर में ही गिरना होगा।”

कलेक्टर साहब अतिथि शिक्षक अक्षय कुमार के व्यंग को समझ गए और बिना कुछ बोले वहां से चले गए।

उन्हें अच्छे से ज्ञात था कि भारत की शिक्षा प्रणाली में यह एक सबसे बड़ा धब्बा है। जो मेहनत करके पढ़ा रहा है उसे वेतन के नाम में ढेला नहीं मिलता वहीं पर सरकारी स्कूलों में जाकर कुर्सियों में टांग फैला कर लेटने वाले शिक्षक लाखों का वेतन हर महीने उठाते हैं।

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