जन्मदिन पर मोमबत्ती क्यों बुझाते है

रोचक जानकारी : जन्मदिन पर मोमबत्ती क्यों बुझाते है

जन्मदिन मे मोमबत्ती को बुझाने की प्रथा की कई कहानियाँ प्रचलित हैं। ऐसा माना जाता हैं की जन्मदिन मे मोमबत्ती बुझाने की प्रथा प्राचीन समय मे ग्रीक से प्रारम्भ हुई थी। ग्रीक के लोग आर्टेमिस की पूजा किया करते थे। आर्टेमिस बच्चो की रक्षा करने वाला और चाँद का देवता हैं। इसलिए प्राचीन समय के ग्रीक वासी आर्टेमिस के जन्मदिन को मनाने के लिए उसके जन्मदिन के दिन मोमबत्ती को जलाया करते थे फिर उन मोमबत्ती को बुझा कर केक काटा करते थे। आर्टेमिस चाँद यानि के रोशनी का प्रतीक मानते थे, इसलिए उसके जन्मदिन मे मोमबत्ती जलाया जाता था। ग्रीक मे ऐसी मान्यता था की जो व्यक्ति अपने जन्मदिन मे जितनी मोमबत्ती बुझा सकता था, उसकी उतनी इच्छाए पूर्ण होती थी। आर्टेमिस एक अविवाहिता यूनानी देवी हैं। आर्टेमिस को शिकार करना बहुत पसंद था, आर्टेमिस अपने शिकार दल के साथ हमेशा शिकार के खोज मे घूमती रहती थी। आर्टेमिस को जंगल की देवी भी माना जाता हैं। रोमन देवी डायना को भी आर्टेमिस के रूप मे ही मान्यता प्राप्त हैं।

भारत में मोमबत्ती जन्मदिन मे क्यो नहीं जलते हैं?

हिंदू धर्म में अग्नि को बहुत ही पवित्र माना जाता है और इसलिए अगर आदमी को दीपक के रूप में जब जलाया जाता है तो उसे बुझाना असुर माना जाता है इसीलिए हिंदू धर्म को मानने वाले लोग जन्मदिन में प्रकाश रूपी मोमबत्ती को बुझाते नहीं है बल्कि मोमबत्ती का भी इस्तेमाल नहीं करते। अक्सर ज्यादातर हिंदू घरों में जन्मदिन के दिन मिट्टी के बने दिए को जलाते हैं और उसे हवा फूंक मार कर बुझने नहीं है बल्कि भगवान के पास रखकर उसे जलते हैं। मोमबत्ती या दीपक को बुझाने की प्रथम हिंदू धर्म में नहीं है। इसीलिए अक्सर देखने को मिलता है कि हिंदू घरों में जन्मदिन के दिन केक में मोमबत्ती नहीं जलाते हैं और कुछ लोग तो केक को काटते भी नहीं है।

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भारत में मान्यता है कि जन्मदिन के दिन मोमबत्ती बुझाने से उम्र घटती है और कई प्रकार के रोग हो सकते हैं इसलिए भारत में बहुत से लोग जन्मदिन के दिन मोमबत्ती को बुझाते नहीं है और ना ही उसे केक के आसपास इस्तेमाल करते हैं। कुछ लोग जन्मदिन के दिन मोमबत्ती का इस्तेमाल इसलिए नहीं करते क्योंकि मोमबत्ती कई प्रकार के अपशिष्ट यानी की कचरों से बनती है तो कई बार जानवरों की फैट से बनाई जाती है इसलिए बहुत से लोग भारत में मोमबत्ती के इस्तेमाल से बचते हैं।

जन्मदिन में मोमबत्ती की वजह से कई बार दुर्घटनाएं होती हैं। इसीलिए समझदार लोग जन्मदिन के दिन मोमबत्ती का इस्तेमाल नहीं करते हैं। अगर आप गूगल में सर्च करें जन्मदिन के मोमबत्ती से दुर्घटनाएं या घर में आग लगने के बारे में खोजे तो आपको कई समाचार मिल जाएंगे जहां पर आपको पढ़ने को मिल जाएगा की जन्मदिन की मोमबत्ती की वजह से घर में आग लग गई या फिर जिस व्यक्ति का जन्मदिन है उसके चेहरा मोमबत्ती को बुझाते वक्त झुलस गया। ऐसे बहुत सारे समाचार आपको देखने को मिल जाएंगे इसलिए भारतीय समझदार लोग जन्मदिन के दिन मोमबत्ती का इस्तेमाल बिल्कुल भी नहीं करते हैं।

मोमबत्ती रखने का पात्र को क्या कहते है?

मोमबत्ती रखने का पात्र को कैन्डलस्टिक कहते हैं। मोमबत्ती को इंग्लिश मे कैन्डल कहा जाता हैं। और एक डंडी नुमा पात्र मे कैन्डल को रखा जाता हैं, इसलिए उस पात्र को स्टिक कहा जाता हैं, क्योंकि वह स्टिक मोमबत्ती के स्टैंड के रूप मे कार्य करती हैं इसलिए उसे कैंडलस्टिक कहते हैं।

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मोमबत्ती जलाने पर मोम कहां जाता है?

बहुत से लोगो का प्रश्न होता हैं की जब मोमबत्ती को जलाया जाता हैं तो मोमबती मे इस्तेमाल होने वाला मोम जलने के बाद कहा जाता हैं, क्योंकि मोमबत्ती जलाने के बाद वहाँ पर अवशेष के रूप मे कुछ भी नहीं होता हैं। जब लकड़ी को जलाया जाता हैं तो लकड़ी के स्थान पर अवशेष के रूप मे राख़ वहाँ पर रहती हैं। लेकिन जब मोमबत्ती को जलाया जाता हैं तो उस स्थान पर कुछ भी नहीं बचता हैं। विज्ञान के अनुसार मोमबत्ती मे इस्तेमाल होने वाली मोम वास्प या कार्बनडाईऑक्साइड बन कर हवा मे घुल-मिल जाता हैं।

मोमबत्ती को पानी में क्यों डाला जाता है?

मोमबत्ती मे जब आग लगती हैं तो मोमबत्ती के बीच मे लगा धागा तेजी से जलता है, जिसकी बजह से मोमबत्ती की मोम भी तेजी से पिघलती हैं। इसलिए मोमबत्ती जल्दी खत्म होकर बुझ जाती हैं। इसलिए बहुत से लोग मोमबत्ती को बहुत से लोग पानी मे या फिर पानी भरे ग्लास मे रखते हैं ऐसा करने से मोमबत्ती ज्यादा देर तक जलती हैं और रोशनी करती हैं।

सस्ती मोमबत्तियां किस चीज से बनती हैं?

सबसे सस्ती मोमबत्ती पैराफिन से बनती हैं। पैराफिन मोम पैट्रोलियम पदार्थ का अपशिष्ट यानि की कचड़ा होता हैं। पैट्रोलियम पदार्थ का यह अपशिष्ट ज्वलनशील होता हैं। इसलिए यह जल सकता हैं। इसी कचड़े से सस्ती मोमबत्ती बनाई जाती हैं।

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