ओज़ोन परत का परिचय, ओज़ोन परत के क्षरण के प्रमुख कारण और बचाव, ओज़ोन परत के क्षरण से मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण पर प्रभाव, ओज़ोन परत के क्षरण को रोकने के लिए उपाय, ओजोन में छेद कब हुआ, विश्व ओज़ोन दिवस क्यो और कब मनाया जाता हैं,

ओज़ोन परत का परिचय एवं क्षरण: एक गंभीर समस्या

ओज़ोन परत का परिचय

ओज़ोन परत पृथ्वी के वायुमंडल की एक परत है जो पृथ्वी की सतह से लगभग 10 से 30 किलोमीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यह परत सूर्य से आने वाली हानिकारक पराबैंगनी (UV) किरणों को अवशोषित करती है, जो त्वचा के कैंसर, मोतियाबिंद और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकती हैं।

ओज़ोन परत में ओज़ोन गैस (O3) की एक छोटी मात्रा होती है, जो ऑक्सीजन गैस (O2) के तीन परमाणुओं से बनी होती है। ओज़ोन परत के निर्माण के लिए सूर्य के प्रकाश और ऑक्सीजन गैस की आवश्यकता होती है। ओज़ोन परत के क्षरण का सबसे प्रमुख कारण ओज़ोन-क्षीणकारी पदार्थों (ODS) का उत्सर्जन है। ODS में क्लोरोफ्लोरोकार्बन (CFCs), हैलोन और मेथिल ब्रोमाइड शामिल हैं। ये पदार्थ विभिन्न औद्योगिक और वाणिज्यिक अनुप्रयोगों में उपयोग किए जाते हैं, जैसे कि रेफ्रिजरेटर, एयर कंडीशनर, और स्प्रे कैन। जब ODS समताप मंडल में पहुंचते हैं, तो वे सूर्य के प्रकाश के संपर्क में आते हैं और टूट जाते हैं। इस टूटने से क्लोरीन और ब्रोमीन परमाणुओं का निर्माण होता है, जो ओज़ोन अणुओं को नष्ट कर देते हैं।

ओज़ोन परत के क्षरण के प्रमुख कारण और बचाव

ओज़ोन परत के क्षरण के प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं:

  1. ओज़ोन-क्षीणकारी पदार्थों (ODS) का उत्सर्जन: ओज़ोन-क्षीणकारी पदार्थ (ODS) ऐसे पदार्थ हैं जो ओज़ोन परत को नष्ट करते हैं। इन पदार्थों में क्लोरोफ्लोरोकार्बन (CFCs), हैलोन और मेथिल ब्रोमाइड शामिल हैं। ये पदार्थ विभिन्न औद्योगिक और वाणिज्यिक अनुप्रयोगों में उपयोग किए जाते हैं, जैसे कि रेफ्रिजरेटर, एयर कंडीशनर, और स्प्रे कैन।
  2. जैव-जैव रसायन: कुछ जैविक प्रक्रियाएं, जैसे कि समुद्री शैवालों द्वारा क्लोरीन गैस का उत्पादन, ओज़ोन परत को भी नुकसान पहुंचा सकती हैं।
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ओज़ोन परत के क्षरण से मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण पर प्रभाव

  1. त्वचा कैंसर में वृद्धि: बढ़ी हुई पराबैंगनी विकिरण त्वचा कैंसर का कारण बन सकती है, जिसमें मेलेनोमा, त्वचा कैंसर का सबसे गंभीर प्रकार भी शामिल है।
  2. मोतियाबिंद: बढ़ी हुई पराबैंगनी विकिरण से मोतियाबिंद भी हो सकता है, जो आँख के लेंस का एक धुँधलापन है जो अंधापन का कारण बन सकता है।
  3. दमित प्रतिरक्षा प्रणाली: पराबैंगनी विकिरण प्रतिरक्षा प्रणाली को दबा सकती है, जिससे लोगों को संक्रमणों के प्रति अधिक संवेदनशील बनाया जा सकता है।
  4. पौधों और पारिस्थितिक तंत्रों को नुकसान: पराबैंगनी विकिरण पौधों और पारिस्थितिक तंत्रों को नुकसान पहुंचा सकती है, जिसमें प्लवक भी शामिल हैं, जो खाद्य श्रृंखला का आधार हैं।

ओज़ोन परत के क्षरण को रोकने के लिए उपाय

  1. ODS के उत्पादन और उपयोग को समाप्त करना: 1987 में, मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर किए गए, जो एक अंतरराष्ट्रीय संधि है जो ODS के उत्पादन और उपयोग को समाप्त करती है। इस संधि के परिणामस्वरूप, ओज़ोन स्तर में सुधार देखा जा रहा है।
  2. ODS के विकल्पों का उपयोग करना: ODS के लिए सुरक्षित और टिकाऊ विकल्पों का विकास किया जा रहा है। इन विकल्पों में हाइड्रोफ्लोरोकार्बन (HFCs), अमोनिया और कार्बन डाइऑक्साइड शामिल हैं।
  3. सार्वजनिक जागरूकता बढ़ाना: लोगों को ओज़ोन परत के क्षरण और इसके प्रभावों के बारे में जागरूक करना महत्वपूर्ण है। इससे लोग ओज़ोन परत की रक्षा के लिए व्यक्तिगत और सामूहिक कार्रवाई करने के लिए प्रेरित हो सकते हैं।

ओजोन में छेद की खोज कब की गई?

ओजोन परत के क्षरण की खोज ब्रिटिश अंटार्कटिक सर्वेक्षण (बीएएस) के वैज्ञानिकों की एक टीम द्वारा की गई थी, जिसका नेतृत्व जोसेफ फारमैन, ब्रायन गार्डिनर और जोनाथन शंकिन ने किया था। 1985 में, अंटार्कटिका में हैली बे अनुसंधान स्टेशन से डेटा का विश्लेषण करते हुए, उन्होंने वसंत के मौसम में ओजोन के स्तर में एक महत्वपूर्ण कमी देखी। नेचर पत्रिका में प्रकाशित इस खोज ने ओजोन छेद घटना की पहली वैज्ञानिक मान्यता को चिह्नित किया।

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ओजोन क्षरण की गंभीरता को ध्यान पर रखते हुये 1987 में मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल पर अंतर्राष्ट्रीय समुदाय एवं देशो ने हस्ताक्षर किए। इस अंतरराष्ट्रीय संधि का उद्देश्य ओडीएस के उत्पादन और उपयोग को चरणबद्ध तरीके से समाप्त करना था, जिससे ओजोन क्षरण को रोकना और रोकना था। मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल के परिणामस्वरूप, ओजोन का स्तर धीरे-धीरे ठीक हो रहा है, और ओजोन छेद धीरे-धीरे सिकुड़ रहा है।

मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल 1987 में ओजोन परत को क्षीण करने वाले पदार्थों (ODS) के उत्पादन और उपयोग को कम करने और समाप्त करने के लिए एक अंतरराष्ट्रीय संधि है। मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल के तहत, ODS के उत्पादन और उपयोग को धीरे-धीरे कम किया जा रहा है। 2030 तक, ODS का उत्पादन और उपयोग पूरी तरह से समाप्त होने की उम्मीद है। मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल को पर्यावरणीय इतिहास में एक महत्वपूर्ण सफलता माना जाता है। इसने ओजोन परत के क्षरण को रोकने और उलटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

विश्व ओज़ोन दिवस क्यो और कब मनाया जाता हैं

विश्व ओजोन दिवस हर साल 16 सितंबर को मनाया जाता है। यह दिन ओजोन परत के महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाने और इसे संरक्षित करने के लिए कई कार्यक्रमेवम रैली की जाती हैं। यह दिन लोगों को ओजोन परत के महत्व और इसके क्षरण के संभावित परिणामों के बारे में शिक्षित करने का एक अवसर प्रदान करता है। विश्व ओजोन दिवस के अवसर पर, विभिन्न कार्यक्रम और गतिविधियाँ आयोजित की जाती हैं जो ओजोन परत के बारे में जागरूकता बढ़ाती हैं।

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