वेरिएबल का परिचय

Variable in C in Hindi : सी प्रोग्राममिंग मे वेरिएबल एक बहुत ही महत्वपूर्ण इकाई हैं। सी प्रोग्राममिंग मे प्रोग्राम डाटा को रखने के लिए मेमोरी का इस्तेमाल करता हैं। उस मेमोरी लोकेशन जहां पर सी प्रोग्राम किसी वैल्यू को प्रोग्राम के execution (क्रियान्वयन) के समय रखता हैं, उस लोकेशन को एक नाम दिया जाता हैं और उसे ही वेरियबल कहा जाता हैं। जिसके माध्यम से सी प्रोग्राम उस मेमोरी लोकेशन मे स्टोर वैल्यू को प्रोग्राम मे उपयोग करता हैं।

उदाहरण के लिए अगर आपके सामने 5 कुर्सियाँ रखी हुई हैं। उनमे से एक विशेष कुर्सी को आप किसी के माध्यम से अपने पास लाना चाहते हैं तो आप कैसे किसी व्यक्ति को वह कुर्सी लाने को कहेंगे। अगर हम हर कुर्सी को एक नाम दे यानि उसमे उसके नाम की चिट लगा दे तो हम अपनी मनचाही कुर्सी को किसी दूसरे व्यक्ति की सहायता से अपने पास ला सकते हैं। हमे बस मनचाही कुर्सी का नाम बताना होगा और दूसरा व्यक्ति आपके नाम के बताए अनुसार कुर्सी मे लगे चिट को पढ़ कर सही कुर्सी आप को दे देगा।

इसी तरीके से कम्प्युटर की मेमोरी का टेम्प्रेरी नामकरण किया जाता हैं, जिससे प्रोग्राम जब रन हो रहा हो तो सी प्रोग्राम किसी निश्चित मेमोरी ब्लाक से डाटा को लेकर उसे प्रोसेसर तक पहुंचा कर प्रोसेस कर सके।

किस मेमोरी ब्लाक से डाटा लेना है यह कम्प्युटर को कैसे पता होगा?

इसी समस्या को हल करने के लिए मेमोरी के उस ब्लाक मे जहां हमारा डाटा रखा हुआ होता हैं सी प्रोग्राम उसे एक नाम दे देता हैं। और उस नाम के सहारे उस मेमोरी ब्लाक मे रखे डाटा को प्रोग्राम के अंदर उपयोग करते हैं।

See also  कम्प्यूटर का परिचय (Introduction of Computer)

मेमोरी का प्रोग्राम मे क्या रोल हैं

बहुत से लोगो के मन मे अब यह प्रश्न उठ रहा होगा की मेमोरी का प्रोग्राम से क्या लेना देना हैं? तो विद्यार्थियो यह बात ध्यान रखे की कम्प्युटर मे करेंट समय मे जो भी एप्लिकेशन, प्रोसैस आदि आपके कम्प्युटर मे चल रही होती हैं, वह सब मेमोरी मे ही चल रही होती हैं, यानि आपके रैम मे। और जब भी हम सी मे प्रोग्राम बनाते है तो ज़्यादातर प्रोग्राम ऐसे होते हैं जिनसे आउटपुट पाने के लिए हमे कुछ वैल्यू इनपुट करनी होती हैं। नीचे दिये गए चित्र को देख कर आपको मेमोरी यानि रैम की उपयोगिता सी प्रोगाममिंग मे क्या हैं समझ मे आ जाएगी।

ऊपर दिये चित्र को देख कर यह समझ आ रहा हैं की जब भी कोई यूजर कम्यूटर मे डाटा input करता हैं तो वह मेमोरी मे स्टोर होता हैं, इसके बाद प्रोसेस होने के लिए CPU के पास जाता हैं और जब प्रोसेस हो जाता हैं तो वापस मेमोरी मे आ जाता हैं और आउटपुट डिवाइस की सहायता से यूजर को प्रदर्शित हो जाता हैं।

वेरियबल की घोषणा [Declaration of Variable]

वेरियबल की घोषणा करने के लिए दो कार्य करने होते हैं, 

  1. पहला यह की वेरियाबल किस प्रकार की वैल्यू को स्टोर करने के लिए बनाया जा रहा हैं।
  2. दूसरा वेरियबल का नाम तय करना की वेरियबल का क्या नाम होगा।

सबसे पहले हम वेरियबल के प्रकार को निर्धारित करेंगे। वेरियबल का क्या प्रकार होगा इसका पूरा किरदार आपके अपने समझदारी पर होता हैं, अगर आप प्रोग्रामर हो और मैं आप से यह कहूँ की एक प्रोग्राम बनाए जिसमे हमे दो संख्याओ को जोड़ना हैं। उसका जो भी रिज़ल्ट आए उसे प्रिंट कराना हैं?

See also  कम्प्यूटर के विकास का इतिहास (History of Computer Development)

तब इस स्थिति मे आप को क्या लगता हैं की किस प्रकार का वेरियबल होना चाहिए, आपने डाटा टाइप पढ़ लिया हैं तो अब आप अपनी समझदारी का परिचय देते हुये वेरियबल के प्रकार का निर्धारण कर सकते हैं। जैसे ऊपर पैरा मे दिये केस मे हम integer या float दोनों मे से कोई एक ले सकते हैं। अगर आउटपुट राउंड फिगर मे चाहिए तो integer चुने अन्यथा float चुने।

अब समय हैं वेरियबल को नाम देने का, जिसके लिए हमे नीचे दिये गए नियमो का पालन करना होगा।

वेरियबल बनाने के नियम क्या हैं।

  1. किसी भी वेरियबल का नाम अँग्रेजी के अक्षर या फिर अंडरस्कोर “_” से प्रारम्भ होना चाहिए। जैसे – abc, stdname, _roll, _name आदि।
  2. वेरियबल के बीच मे कोई भी स्पेस नहीं होना चाहिए जैसे stu name, father name आदि गलत वेरियबल नेम हैं क्यूंकी इनके बीच मे स्पेस हैं।
  3. अगर दो या दो से अधिक शब्दो को जोड़ कर वेरियबल नेम बनाना चाहते हो तो अंडरस्कोर का उपयोग करे जैसे – father_name, Teacher_name, school_name आदि।
  4. वेरियबल के नामो मे उपयोग अक्षरो की संख्या 8 से ज्यादा न रखे। यह नियम प्रोग्राम मे वेरियबल को लिखने मे सहूलियत देने के लिए बनाया गया हैं।
  5. वेरियबल के अंत मे नंबर का उपयोग किया जा सकता हैं जैसे a1, a2, a3 आदि ये तीन वेरियाबल हैं जिनमे हमने अंत मे संख्या उपयोग किया हुआ हैं।
  6. वेरियबल का नाम किसी कीवर्ड के नाम पर नहीं रखा जा सकता हैं।

Single Variable Declaration

सिंगल वेरियबल को अगर आप बनाना चाहते हैं तो उसको बनाने के लिए आप निम्न तरीके से सी मे कोड लिखना होगा।

int a;

वेरियाबल निर्धारण के बाद सेमीकालम लगाना अनिवार्य हैं। अगर आप एक लाइन मे एक वेरियबल परिभाषित करते हैं तो यह single variable declaration कहलाएगा।

See also  वेब ब्राउज़र क्या है | What is Web Browser?

Multi Variable Declaration

माना अगर कोई प्रोग्राम मे 5 वेरियबल बनाने हैं और सभी का डाटा टाइप integer हैं तो कैसे वेरियबल बनाएँगे।

पहला तरीका इस प्रकार हैं।

int a;

int b;

int c;

int d;

int e;

पर इसमे पाँच बार int लिखना पड़ गया तथा पाँच बार सेमीकालम लगाना पड़ गया, हालांकि यह तरीका भी वेरियबल बनाने के लिए सही हैं पर इसमे प्रोग्रामर को ज्यादा समय लगेगा तथा कम्प्युटर की कार्य क्षमता भी प्रभावित होगी। इसलिए ऊपर परिभाषित पाँच वेरियबल को हम 

निम्न प्रकार से भी परिभाषित कर सकते हैं, जिससे प्रोग्रामर और कंपाइलर दोनों का काफी समय बचेगा।

int a,b,c,d,e;

अब आप पहले और दूसरे तरीके मे खुद ही तुलना कर सकते हैं। की वेरियबल परिभाषित करने के लिए कौन सा तरीका उचित होगा। वेरिएबल को समझने के लिए नीचे दिये विडियो को भी देख कर कुछ नया सीखा जा सकता हैं। इसलिए चाहे तो वीडियो को जरूर देखे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *