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नर्मदा नदी को चिर कुमारी नदी क्यों कहा जाता हैं? | narmada ko chir kunwari nadi

Narmada ko chir kunwari nadi kyo kahate hain: बचपन मे कई बार दादी के सुनाये किस्से मो नर्मदा माँ की कहानी सुनी हैं। दादी ने बताया था की नर्मदा आजीवन कुमारी थी, इस लिए उन्हे चिर कुमारी नदी कहा जाता हैं। पर अक्सर हम सभी को नर्मदा नदी के चिर कुमारी होने की बात पता चलती हैं तो मन मे पहला प्रश्न यही आता हैं की आखिर नर्मदा को चिर कुमारी क्यो कहा जाता हैं और इसके पीछे की कहानी क्या हैं? आज इस लेख के माध्यम से हम इसी कहानी पर चर्चा करेंगे।

नर्मदा की चिर कुमारी होने की कथा

नर्मदा का प्राचीन नाम रेवा नदी है और ऐसा माना जाता है की नर्मदा नदी का विवाह सोनभद्र नाम के नद से तय हुआ था। नद नदी का पुरुष सूचक शब्द है। नर्मदा राजा मेंकल की एक रूपवती पुत्री थी। राजा मेकल अपनी पुत्री नर्मदा की शादी के लिए एक शर्त रखी थी, उन्होंने एक दुर्लभ फूल लाने के लिए कहा था। जो वह दुर्लभ फूल लेकर आएगा उसका विवाह नर्मदा के साथ किया जाएगा।

राजकुमार सोनभद्र वह पुष्प लेकर आए थे, इस तरह राजा मेखल ने सोनभद्र और नर्मदा का विवाह तय कर दिया। नर्मदा ने राजकुमार सोनभद्र को कभी नहीं देखा था, लेकिन उसके रूप और पराक्रम की चर्चा को सुनकर वह उसे मन ही मन पसंद करने लगी थी और सोनभद्र को अपना पति मान चुकी थी। विवाह के अभी कुछ दिन बचे हुए थे लेकिन नर्मदा से रहा नहीं गया और उसने अपनी दासी जोहीला के हाथों सोनभद्र को एक पत्र भेजने की सूझी। जोहिला भी हंसी मजाक करने के चक्कर में नर्मदा के आभूषण और वस्त्र लेकर राजकुमार सोनभद्र से मिलने चली गई।

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सोनभद्र ने जब जोहिला को देखा तो उन्हें लगा यही नर्मदा है और वह उसके प्यार में पड़ गया। इधर जोहिला की भी नियत बदल गई और वह बिना सच्चाई बताएं राजकुमार के प्रेम में पड़ गई। कई दिनों तक जोहिला की कोई खबर नहीं आई, तो नर्मदा से रहा नहीं गया और नर्मदा सोनभद्र को देखने उनके पास चल पड़ी। लेकिन जब वहां पर पहुंची तो उन्होंने सोनभद्र और जोहिला को एक साथ हंसी मजाक एवं प्रेम वार्तालाप करते हुए सुना। जिससे उनकी क्रोधाग्नि भड़क गई और उन्होंने अपने आप को ठगा महसूस किया और वह उसी समय उल्टी दिशा पश्चिम की ओर सोनभद्र से दूर चल पड़ी। सोनभद्र ने जब नर्मदा को गुस्से में जाते हुए देखा तो सोनभद्र को अपनी गलती का एहसास हो गया और वह नर्मदा के पीछे कुछ दूर तक आया लेकिन स्वाभिमान और घमंडी होने की वजह से वह भी नर्मदा के उल्टे पूर्व की ओर चलने लगा। इस तरह नर्मदा और सोनभद्र का कभी मिलाप नहीं हो पाया।

भौगोलिक दृष्टि से भी यह सही लगता है क्योंकि जयसिंह नगर के पास एक गांव बरहा है, जहां पर जोहिला नदी सोनभद्र नदी से मिल जाती है और कहानी के अनुसार रूठी राजकुमारी नर्मदा अकेली उल्टी दिशा की ओर बहती हुई दिखाई देती है।

नर्मदा नदी का प्राचीन नाम

हिन्दू ग्रंथो मे नर्मदा नदी को रेवा नदी के नाम से भी पुकारा गया हैं। नर्मदा नदी को गंगा से भी पवित्र माना गया हैं। माना जाता हैं की गंगा भी साल मे एक बार नर्मदा का स्नान करने आती हैं।

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