hindi story अक़्लमंद दादी

Best Hindi Story of अकलमंद दादी और कटहल का आचार (2022)

यह कहानी सच्ची घटना पर आधारित और प्रेरित हैं। यह घटना रीवा राज्य से संबन्धित हैं। अगर आपको यह hindi story पसंद आई हैं तो प्लीज इसे शेयर करे। और नीचे अपने विचारो को कमेन्ट कर के साझा करे।

किसी गांव में वसुंधरा नाम की एक काकी रहती थी। गांव के लोग उन्हें गांव का सबसे अकलमंद इंसान समझते थे। जहां पर वसुंधरा काकी मौजूद रहती थी, वहां कभी भी समस्याएं उत्पन्न ही नहीं हो पाती थी। उनके पास हर समस्या का कोई न कोई समाधान होता था।

एक बार चौमासे में यानी बारिश के मौसम में गांव के एक बुजुर्ग पति-पत्नी ने भागवत कथा का आयोजन किया था। रोज उनके यहां पूरा गांव भोजन करता था। लेकिन आखरी दिन भागवत समाप्त होने के बाद जब भोज की तैयारी हो रही थी तो पकवान बनाने वालों ने देखा की सब्जियां कुछ कम है। चौमासे का महीना था बाहर से जाकर सब्जी लाना मुश्किल था। क्योंकि गाँव चारो ओर से नदी से घिरा था। और बारिश के दिनो मे नदी उफना जया करती थी। इस लिए बारिश के दिनो मे यह गाँव बाहर की दुनिया से कट जाया करता था। इसलिए बाहर जा कर सब्जियाँ खरीद कर लाना मुश्किल था। अब एक ही उपाय था कि गांव वालों को अपनी समस्या बताई जाए और गांव वालों से कुछ सब्जियां उधार ले ली जाए। उसी समय वहां पर वसुंधरा काकी आ गई और उन्होंने परेशान उन दोनों वृद्ध पति-पत्नी से समस्या का कारण पूछा। दोनों ने बताया की आज के भोजन के लिए सब्जियां कुछ कम पड़ रही हैं, जो भी सब्जी है, उनकी मात्रा कम है। कुछ आलू है तो कुछ कद्दू है, कोई भी ऐसी सब्जी नहीं है जिसका इस्तेमाल करके सब्जी बनाई जा सके।

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तभी काकी की नजर कटहल के पेड़ पर गई और उन्होंने तुरंत दोनों वृद्धि से पूछा कि आपके यहां कटहल के अचार कितने बर्नी मे रखा हुआ हैं? तो दोनों वृद्ध ने बताया कि लगभग 10 से 15 बरनी कटहल का अचार घर में है। फिर क्या था, वसुंधरा काकी ने तुरंत आठ बरनी कटहल के अचार के मंगवाई और उनको पानी से साफ करके साबुत कटे हुए कटहल अलग कर लिए और उससे स्वादिष्ट कटहल की सब्जी बनवाई। इसके अलावा जितने भी थोड़ी-थोड़ी सब्जियां थी, उनको मिलाकर मिक्स सब्जी बनवा दी।

अंत में जब भोज के लिए पंगत लगाई गई और खाना को परोसा गया तो लोग अपनी उंगलियां चाटते रह गए। उन्होंने कभी भी अपने जीवन मे इस तरह की कटहल की सब्जी नहीं खाई थी। और ना ही कभी मिक्स सब्जी के बारे में उन्होंने खाया था। उसी के बाद से ही हर आयोजन मे मिक्स सब्जी का चलन प्रारंभ हो गया।

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