Vaijanti Phool ki Mala- वैजयंती के पौधे पर बहुत ही खूबसूरत और मनमोहक सुंदर फूल लगते हैं। यह फूल देखने में बहुत ही मनमोहक होते हैं। वैजयंती के पौधे पर फूलों के बाद बीज भी आते हैं, इन बीजों का इस्तेमाल करके माला बनाई जाती है। वैजयंती के पौधे में लगे हुए फूल भगवान विष्णु को और माता लक्ष्मी को बहुत ही पसंद है। माना जाता है जिन घरों में वैजयंती का पौधा होता है उन घरों में कभी भी किसी प्रकार की कोई बाधा तथा कष्ट नहीं आते हैं। आज इस लेख के माध्यम से हम वैजयंती के फूलों के लाभों के बारे में जानेंगे तो आइए बिना देर किए हुए हम इनके लाभों के बारे में जानते हैं

सौभाग्यशाली पौधा

वैजयंती के पौधे तथा फूलों को सौभाग्य प्रदान करने वाला वृक्ष या पौधा माना जाता है। जो व्यक्ति वैजयंती के पौधों के बीज से बनी हुई माला को पहनता है वह सौभाग्य युक्त हो जाता है और दुर्भाग्य उसके आसपास भी नहीं भटकते हैं। वैजयंती फूलों की माला को पहनने के लिए सोमवार  तथा शुक्रवार के दिन माला को गंगाजल में अच्छे से धोकर धारण करना चाहिए।

माता लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं

वैजयंती के बीजों से बनी हुई माला (Vaijanti Phool ki Mala) का इस्तेमाल करके भगवान विष्णु या सूर्य देव की उपासना करने से ग्रह नक्षत्रों के बुरे प्रभाव खत्म हो जाते हैं। जिन लोगों को शनि की वजह से बहुत परेशानी होती है ऐसे लोगों को वैजयंती के बीजों से बनी हुई माला धारण करना चाहिए और भगवान विष्णु या फिर सूर्य देव की उपासना करनी चाहिए। ऐसा करने से शनि दोष से मुक्ति मिलती है। वैजयंती के बीजों से बने हुए माला को धारण करने वाले पर माता लक्ष्मी सदैव प्रसन्न रहती हैं।

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आत्मविश्वास में वृद्धि

वैजयंती के बीज से बने हुए माला का इस्तेमाल करते जो व्यक्ति प्रतिदिन अपने इष्ट देवता का जप करता है उस व्यक्ति को कभी भी निराशा अपने प्रभाव में नहीं ले पाती है तथा उस व्यक्ति को हमेशा नई शक्ति का संचार होता रहता है तथा आत्मविश्वास में वृद्धि होती है।

मानसिक शांति

जो व्यक्ति अपने मान सम्मान को बढ़ाना चाहता है वह वैजयंती के बीजों की बनी माला को धारण करें। जो व्यक्ति वैजयंती के बीजों से बनी माला को धारण करता है उसका मन हमेशा शांत होता है तथा वह व्यक्ति अपने कार्य क्षेत्र में सफलता पाता रहता है जिसकी वजह से मान सम्मान में वृद्धि होती है।

मनोकामना पूर्ण करने वाला

वैजयंती के बीजों से बनी हुई माला को पुष्य नक्षत्र में धारण करने से बहुत ही शुभ फल प्राप्त होते हैं। जो व्यक्ति पुष्य नक्षत्र में वैजयंती के बीजों की माला (Vaijanti Phool ki Mala) को धारण करता है उसकी सभी मनोकामना पूर्ण हो जाती है।

विवाह में आ रही बाधा दूर होती है

जिन लोगों का विवाह होने में कई प्रकार की रुकावट आती हो तथा लाख प्रयास के बावजूद भी विवाह ना हो पा रहा हो ऐसे लोगों को वैजयंती माला का नित्य जाप करना चाहिए। जाप करते समय ओम नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का उच्चारण करना चाहिए। ऐसा करने से विवाह में आ रही सभी बाधाएं दूर होती हैं। इस जब को पूरा करने के बाद केले के पेड़ की पूजा भी करनी चाहिए।

वैजयंती माला का महत्व (Vaijanti Phool ki Mala)

एक प्राचीन कथा के अनुसार देवों के राजा इंद्र अपने हाथी ऐरावत पर यहां वहां भ्रमण कर रहे थे तभी एक दिन उन्हें रास्ते में महर्षि दुर्वासा से मुलाकात हुई। दुर्वासा ऋषि ने अपने गले से एक पुष्प माला उतार कर इंद्र को भेंट स्वरूप दे दिया। दुर्वासा ऋषि के जाने के बाद इंद्र ने अभिमान में आकर पुष्प की माला को नीचे फेंक दिया, जिसे ऐरावत हाथी अपने पैरों तले रौंद डाला। अपने द्वारा दी गई उस पुष्प माला का इस तरीके से अपमान देखकर महर्षि दुर्वासा को बहुत क्रोध आया। और उन्होंने इंद्र को लक्ष्मीहीन होने का श्राप दे दिया। इंद्र के इस अहंकार को देखकर माता लक्ष्मी स्वयं इंद्र से रुष्ट हो गई और जिसके परिणाम स्वरूप इंद्र को दर-दर भटकना पड़ा।

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भगवान कृष्ण को प्रिय है वैजयंती माला

बहुत ही कम लोगों को यह ज्ञात होगा कि भगवान श्री कृष्ण को वैजयंती माला बहुत पसंद है जिस प्रकार भगवान भोलेनाथ के गले में सदैव नाग होते हैं ठीक उसी प्रकार भगवान कृष्ण के गले में सदैव वैजयंती माला का फूल होता है। वैजयंती माला के पौधों में बहुत ही सुंदर लाल और पीले रंग के पुष्प लगते हैं जो कि भगवान कृष्ण को बहुत ही पसंद है जिन घरों में वैजयंती माला का पौधा होता है , उन घरों में भगवान कृष्ण की कृपा साक्षात होती है।

विजय दिलाने वाली माला (Vaijanti Phool ki Mala)

हिंदू शास्त्रों में वैजयंती माला (Vaijanti Phool ki Mala) को विजय प्राप्त कराने वाली माला के रूप में भी जाना जाता है। यह पुष्प और माला भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी को बहुत ही प्रिय है। जब हम कृष्ण भगवान की कहानियों को पढे तो हमें पता चलता है कि भगवान कृष्ण को सबसे पहली बार राधा जी ने स्वयं अपने हाथों से भगवान कृष्ण को वैजयंती के फूलों वाली माला पहनाई थी। भगवान कृष्ण ने दो बार बताया है कि वह दो कारणों से वैजयंती माला को धारण करते हैं। पहला कारण कि यह फूल उन्हें राधा की याद दिलाते हैं तथा दूसरा कारण की लक्ष्मी ने वैजयंती माला को अपना निवास स्थान बना लिया था।

बाली और सुग्रीव के युद्ध मे सुग्रीव को राम भगवान ने माला पहनने के लिया दिया था, वह माला वैजयंती के फूले से बनी थी। इस लिए इस फूल को विजय दिलाने वाला फूल भी कहते हैं।

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ग्रह दोषों को दूर करते हैं

शास्त्र में बताया गया है की वैजयंती माला के फूलों से जो भी जातक भगवान विष्णु और प्रकाश के देवता सूर्य देव की उपासना करता है उसके कुंडली में मौजूद सभी प्रकार के दोष समाप्त हो जाते हैं।

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