हिन्दी कहानी – बरहसिंग्घ और उसके बदसूरत पैर | Hindi Story – Reindeerand its ugly feet

हिन्दी कहानी – बरहसिंग्घ और उसके बदसूरत पैर | Hindi Story – Reindeerand its ugly feet

यह hindi story एक बरासिंघा पर आधारित हैं। जो की अपने सिंघो पर बहुत घमंड करता था, और पैरो से नफरत करता था, लेकिन उसके जान से प्यारे सिंघो ने ही उसे धोखा दे दिया। यह hindi kahani आपको कैसी लगी जरूर बताइएगा। और शेयर भी जरूर करे इस hindi story को

एक बारहसिंघा झील में पानी पीने पहुंचा, वह जल में अपने शरीर की परछाई को देखकर बहुत प्रसन्न हुआ और अपने से ही कहने लगा- ” वाह! भगवान ने मेरा शरीर कितना मनोहर बनाया है. सिर तो मानो सांचे में ही ढाल दिया हो। उस पर लंबे-लंबे और फैले-फैले सीघ कितने प्यारे, कितने सुंदर जान पड़ते हैं। इसके साथ ही साथ मेरे सींग बहुत मजबूत भी है। भला भगवान ने इतने प्यारे, इतने सुंदर, इतने मजबूत सींघ और किसी पशु को दिए हैं? भगवान के इस उपकार के लिए मैं उन्हें बार-बार नमन करता हूं।”

यह कहते कहते बारहसिंघा की नजर अपने पैरों पर पड़ी, अपने पैर को देखते ही बारहसिंघा का रोम-रोम दुखी हो उठा। वह ठंडी सांस छोड़ते हुए कहने लगा- “मेरे यह पैर कितने लंबे, पतले, सूखे और कितने बदसूरत है। हे भगवान! मैंने तुम्हारा क्या बिगाड़ा था जो तुमने मुझे इतना कुरूप पर दिए हैं, जो मेरी सारी सुंदरता और शोभा को मिट्टी में मिला देते हैं।”

बारहसिंघा इसी उधेड़बुन में सोच रहा था कि तभी उसके कानों में शिकारी कुत्तों की आवाज सुनाई पड़ी। कुत्तों की आवाज सुनते ही बारहसिंघा सारी उधेड़बुन भूल गया, अब उसे यह चिंता नहीं थी की वाह कितना सुंदर है या वह कितना बदसूरत है। अब उसकी चिंता थी शिकारी कुत्तों से दूर जाकर अपने प्राण को बचाना। जब वह कुत्तों से बचने के लिए भाग रहा था, तब उसकी नजर अपने पैरों पर पड़ी, यह वहीं बदसूरत पैर थे जिसे देखकर बारहसिंघा दुखी हो जाया करता था, उन्हीं पैरों के सहारे वह भागा जा रहा था और इतनी तेजी से भागा की शिकारी कुत्तों की पकड़ से आगे निकल गया।

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परंतु उसी समय बारहसिंघा के लंबे, छितराए और टेढ़े मेढ़े सींग एक पेड़ की डाली में फस गए। बारहसिंघा बहुत फड़फड़ाया और जोर लगा लगा कर छुटने की कोशिश करने लगा। परंतु डालियों के फैलाव से छुटकारा ना पा सका। इतने में शिकारी कुत्ते दौड़ते दौड़ते उसके पास आ गए। और उसके शरीर पर टूट पड़े, उसके सुंदर शरीर को नोचने पढ़ने लगे। अब तो मानो बारहसिंघे की आंखें खुल गई। उसने मरते मरते कहां- ” मेरी समझ में जो पैर लंबे, पतले।, सूखे और भद्दे थे वह अंग ही मेरे प्राण बचाना चाहते थे। परंतु जो सींघ बड़े प्यारे, बड़े सुंदर जान पढ़ते थे वही मेरे प्राणों के दुश्मन बन गए। उन्हीं की वजह से आज मेरी यह दुर्दशा हुई। सच है प्राणी जिस ओर से निश्चिंत रहता है आमतौर पर उसी और से धोखा खाता है। यदि मैंने पहले ही समझ लिया होता कि वास्तव में सुंदर तो वह अंग है जो अपने काम आता है तो आज मेरी यह दुर्दशा नहीं होती।”

यह सोचते-सोचते बारहसिंघा ने अपने प्राण तज दिए

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