मंगु चूहा आज जल्दी जल्दी अपना काम खत्म कर के अपनी पत्नी के साथ जंगल के दक्षिण की ओर चल दिया, उसके पड़ोसी चन्दन चूहा पहले ही अपने घर से निकल चुका था, आज जंगल के दक्षिण मे नदी किनारे चूहो का महासम्मेलन था जहाँ सभी चूहो का आना बहुत ही जरूरी था। इस समय जंगल मे चूहो के लिए माहौल बहुत ही खराब थे, और सभी चूहो के बीच भय व्याप्त था।

इसलिए चूहो के अध्यक्ष ने महासभा बुलाई थी, मंगु अपने परिवार के साथ महासभा मे पहुच गया था। जहां चूहे के अध्यक्ष “बीरु” नाम का चूहा था,

उसने बताया की “दोस्तो आज इस जंगल मे हमारे लिए बहुत बुरा समय है जैसा इतिहास मे कभी भी नहीं था, टुनटुन नाम की बिल्ली और उसकी पलटन ने पूरे जंगल मे कहर मचा दिया है, हर तरफ हमारे लिए उसने घात लगा रखे है यहाँ तक की उल्लुओ की पलटन ने भी हमारे खिलाफ मोर्चा खोल दिया है, रोज हमारे साथी गायब हो रहे है, कल बलबन चूहे को रात मे घर के बाहर से उठा लिया गया, तो अब आप सब यहा निर्णय ले की हमे क्या करना चाहिए जिससे डर का यह जीवन, समाप्त हो और बिना डरे हम जी सके?”

सभी चूहे अपने अपने तर्क देने लगे कई बुजुर्ग चूहे उन तर्को पर वितर्क करने लगे, आखिर कार निर्णय लिया गया की सभी चूहे नदी मे कूद कर आत्महत्या कर ले जिससे इस डर के जीवन से एक बार मे मुक्ति मिल जाए, क्यूंकी चूहो का मानना था की वह इस प्रकृति के बनाए गए सबसे कमजोर प्राणी है और बिल्ली, उल्लू और सापो का सामना वह नहीं कर सकते।

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अंत मे सभी इस निर्णय से सहमत हो गए और सभी रेवा नदी के तट की ओर बढ़ने लगे, तभी उन्होने देखा की नदी के किनारे जो पानी के छोटे-छोटे गड्ढे है, उसमे वहाँ पर मौजूद मेढक चूहो की विशाल संख्या देख छिपने लगे, कई मेढक नदी मे कूद कर छिप गए, तभी मंगु चूहे को एहसास हुआ की ये मेढक तो हमसे भी कमजोर जीव है, पर इनके अंदर जीवन मे व्याप्त कठिनाइयो से लड़ने की हिम्मत है क्यूंकी मेढको की स्थिति तो चूहो की स्थिति से भी भयंकर थी, तब उसने नदी मे कूदने के प्रस्ताव की निंदा की और मेढको का उदाहरण सबके सामने प्रस्तुत किया, और कहा –“हमे अपने जीवन की आहुति देनी ही है तो क्यो न हम परीथिति का सामना करते हुये अपने जीवन की आहुति दे, जो हमारे लिए ज्यादा सम्मानीय होगा।” इसके बाद सभी चूहो ने नदी मे कूदने का ख्याल छोड़ दिया तथा बिल्ली, उल्लू और साँपो को सबक सिखाने की ठानी।

सीख – कभी भी बुरी परिस्थिति के सामने हार न माने, बल्कि उसका सामना करे।