Chudail ki kahani : बहुत पुरानी बात नहीं हैं बल्कि अभी पहले लॉकडाउन 2020 की बात हैं। मैं मुंबई मे नौकरी करता था, लेकिन लॉकडाउन की वजह से सभी कार्यालय बंद हो गए थे, खाने-पीने के चीजे मिलना बंद हो गई थी। इसके अलावा आने जाने के सभी साधन बंद हो गए थे, किसी तरह से हम लोग आपने गाँव आए, गाँव आकर बहुत ही अच्छा लगा।

गाँव मे लॉकडाउन की वजह से असीम शांति हो गई थी, न कोई वाहन चलते थे, और ना ही कोई प्रदूषण था। डर के साये मे जरूर रह रहे थे, लेकिन जीवन बहुत ही सरल सा हो गया था। पूरा परिवार बहुत दिनो बाद एकत्रित हुआ था। गाँव मे उगाई गई अपने खेतो की ताजी सब्जी मिल जाया करती थी, सुबह शाम शुद्ध हवा मिल रही थी। लेकिन शायद हम परिवार वाले बस मुंबई से अकेले नहीं आए थे, शायद हमारे साथ मुंबई से कोई अनचाहा और अदृश्य मेहमान भी आ गया था। जब से हम लोग मुंबई से अपने गाँव आए थे, हमारे घर मे अजीब अजीब सी घटनाए होने लगी थी। एक रात मेरी अचानक नींद टूटी तो मैंने देखा की कोई औरात रसोई घर से आँगन मे जा रही हैं फिर आँगन मे कुछ ठहरकर वापस रसोई मे जा रही हैं। ऐसा वो बार बार कर रही हैं। मुझे लगा घर का कोई सदस्य होगा, संभव हो भाभी हो, ऐसा सोचकर मैं सो गया। अगली सुबह घर वाले जब उठे तो पता चला की घर की सारी चीजे अस्त-व्यस्त हैं, लेकिन घर से कुछ भी चोरी नहीं हुआ था। इसके बाद सुबह से ही हमारा पालतू कुत्ता घर की तरफ मुंह करके भौकाता ही रहा और शाम होते होते वह मर गया। हम सभी लोग ताजुब और आश्चर्य मे थे की आखिर यह क्या हो रहा हैं, शाम होते ही अचानक से सभी गाय और बछड़े रंभाने (आवाज निकालना) लगे, और शाम को जब दूधलगाने वाला आया तो उसने बताया की एक भी गाय ने आज दूध नहीं दिया हैं। हमारे घर मे 11 गाय उस समय दूध दिया करती थी, लेकिन आज शाम को एक भी गाय ने दूध नहीं दिया।

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इधर जब अंधेरा होने लगा तो घर की लाइट जलायी गई, तो घर की कोई भी बल्ब सही तरीके से नहीं जल रहे थे, बार बार बुझ के फिर से जल जाते। किसी तरह से हम लोगो ने सब्र किया की फिर कुछ ऐसा हुआ की हमारे होश उड़ गए, रात को पूरे घर मे इतने चिड्डे आ गए की खाना बनाना मुश्किल हो गया। सब्जी मे इतने चिड्डे पड़ गए थे, कोई गिनती ही नहीं। घर के सभी लोगो ने रोटी और प्याज खा कर गुजारा किया। अब हमारे घर के बुजुर्ग, हमारे दादा जी ने अपनी शंका जाहीर की की निश्चित रूप से कुछ न कुछ तो गड़बड़ हैं। उन्होने कहा की मुझे तो लग रहा हैं की कोई न कोई बुरी आत्मा हैं जो किसी के साथ घर तक आ गई हैं। दादा की इस बात को सुनते ही सब को विशास होने लगा थी की निश्चित रूप से यही बात हैं।

दादा जी ने कहा की कल सुबह होते हैं, दद्दन भूत बाबा को बुला कर लाएँगे। वो ही अब बता पाएंगे, की आखिर घर मे यह सब क्या हो रहा हैं। तभी मुझे कल रात की बात याद आ गई जब मैंने अपने नींद भरी आखो से किसी औरत को आँगन और रसोई मे बार बार आते-जाते देखा था। मैं तुरंत उस घटना के बारे मे सबके सामने बता दिया। तो घर की सभी औरतों ने माना कर दिया और कहाँ की वो तो रात 10 बजे के बाद रसोई गई ही नहीं थी।

इस बात से सब को यकीन हो गया की घर मे कोई न कोई तो बाहर का आ गया हैं, तभी उसी समय घर के अंदर से बर्तन गिरने की आवाज़े आने लगी। और ज़ोर ज़ोर से किसी के पायल की आवाज आने लगी, पायल की आवाज सुन कर ऐसा लग रहा था, की कोई अंदर नाच रहा हैं।

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तभी अंदर से एक लोटा जैसा कोई बर्तन आया और मेरे पास से होकर मेरे पीछे रखे एक मटके से टकरा गया, और ज़ोर की आवाज आई। अब अंदर से कई बर्तन आने लगे, ऐसा लग रहा था की कोई अंदर से उन बर्तन को हम पर निशाना लगा कर मार रहा हैं। हम सब लोग आँगन से भागे और बाहर वाले आँगन मे आ गए। गाँव मे अक्सर दो आँगन होते हैं। एक अंदर का आँगन और एक बाहर का आँगन।

हमारे उस घर से अब किसी के रोने और चिल्लाने की आवाज़े आने लगी, बीच बीच मे बर्तन के पटके जाने की आवाज़े आने लगी। जिसे सुन कर हमारे पड़ोसी भी आ गए, धीरे धीरे बात पूरे गाँव मे फ़ेल गई, तो दद्दन भूत बाबा भी आखिरकार आ गए। उस दिन हमारे साथ जो घटना हुई, आप विशास नहीं मानेगे, हम सब की रूह काँप गई थी। हम लोगो हिन्दू धर्म की मान्यताओ को नहीं मानते थे और हिन्दू धर्म की रीति रिवाज पर व्यंग किया करते थे, लेकिन उस दिन हमे हिन्दू होने का महत्व पता चला। भूत बाबा ने सुंदर कांड का ज़ोर ज़ोर से उच्चारण करने लगे। कुछ लोगो ने शंख और घड़ी-घंट बजाने लगे। भूत बाबा सुंदर कांड का पाठ करते हुये घर के अंदर चले गए और पूरे घर मे गंगा जल का छिडकाव किया।

तभी एक तेज रोशनी जैसा घर से उड़ते हुये दूर जंगल की तरफ जाते हुये हम सब ने देखा। उस रोशनी के साथ चिल्लाने की बड़ी कर्कश आवाज भी निकल रही थी, ऐसा लगा रहा था की कोई बहुत पीड़ा के साथ चिल्लाते हुये जा रहा हो। वह चिल्लाने वाली चमकदार रोशनी जंगल मे जाकर विलुप्त हो गई। भूत बाबा ने हम से कहा की वह कोई चुड़ैल थी, अब वह जा चुकी है, कल सुबह बाबा वापस आएंगे और घर का बंधन बाधेंगे। हमने अगले दिन से पुनः हिन्दू धर्म के अनुसार घर मे पूजा पाठ करना शुरू कर दिया। हनुमान जी की स्थापना की गई, अब घर का हर सदस्य हनुमान जी को दिया जलाता हैं और हनुमान चालीसा का पाठ करता हैं और शनिवार को सुंदरकांड का पाठ किया जाता हैं। उस दिन के बाद से हमने कभी वैसा अनुभव नहीं किया, सब ठीक हो गया था। भूत बाबा ने बताया की उन्होने उस आत्मा से बात की थी, उसने बताया की वह कई वर्षो से तड़प रही हैं, अपने जन्म भूमि की तलाश मे, इस लिए वह यात्रा करने वालों के साथ चलने लगती हैं। लेकिन जिस स्थान पर वह पहुंचती हैं तो वह स्थान उसका जन्म स्थान नहीं होता हैं तो उसे गुस्सा आती हैं। उसने मुझे अपना जन्म स्थान बताया हैं, अब मैं उसे अपने साथ लेकर उसके जन्म स्थान छोड़ने जा रहा हूँ। ऐसा कहकर भूत बाबा वहाँ से चले गए।

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