कंजूसी और बचत पर आधारित यह दो भाइयो की hindi story हैं। आइये पढ़ते हैं इस कहानी को।

राजेश और आदेश दो भाई थे। राजेश बड़ा जबकि आदेश छोटा भाई था। राजेश एक स्कूल में टीचर के रूप में कार्यरत था और इमानदारी से अपने कर्तव्यों का पालन करता था। छोटा भाई आदेश मनमौजी था और जो भी उसके मन में आता वही करता था। दिन भर दोस्तों के साथ इधर-उधर मटरगश्ती करता, फिरता रहता था। नौकरी तो उसने किया नहीं इसलिए ठेकेदार बन गया और ठेके से कमाए पैसे से उसका परिवार का भरण पोषण होता था। आदेश जितना भी पैसा कमाता वह सभी पैसे वह अपने ऐसो आराम में खर्च कर देता था और दूसरों को भी ऐसा करने के लिए कहां करता था।

उसका कहना था – “हम अपने ही सुख सुविधा के लिए कमाते हैं तो पैसे को बचाने का क्या मतलब और भगवान ने कहा है कि हर व्यक्ति अपने किस्मत का खाता है तो मैं अपने बच्चे के लिए पैसे क्यों बचाऊँ, वह खुद भी कमा कर अपना भरण-पोषण कर लेगा।”

अपने लापरवाह जीवन को सही साबित करने के लिए, वह धार्मिक उपदेशों को तोड़ मरोड़ के पेश करता। जिससे सामने वाले भी उसकी बातों पर आ जाते थे। आदेश का बड़ा भाई राजेश संभल कर पैसे खर्च करता था, वह जितनी जरूरत होती थी, उसके हिसाब से ही पैसे खर्च करता था।

राजेश ऐसो आराम और ठाठ बाट से दूर रहता था और जब भी कोई वस्तु खरीदा तो उसमें काफी मोल भाव करता था। इसलिए सब उसे कंजूस बोला करते थे। राजेश का छोटा भाई आदेश भी राजेश के पीठ पीछे उसकी बुराई करता और उसे कंजूसों का बादशाह कहा करता था।

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आदेश को मन ही मन अपने भाई से कुछ चिढ़ थी, जिसकी वजह से वह जलनवश अपने भाई का पीठ पीछे अपमान और बुराई किया करता था। उसने पूरे गांव में राजेश को कंजूस नाम से प्रसिद्ध कर दिया था और गांव के ज्यादातर लोग जिनमें समझ की कमी थी, वह भी राजेश को कंजूस मानते और उपहास उड़ाया करते थे।

आदेश की पत्नी शहर के निजी विश्वविद्यालय में अंग्रेजी से मास्टर डिग्री कर रही थी। जिसका सही समय पर उसने फीस का भुगतान नहीं किया था, परीक्षा का समय निकट आ गया था, फीस न जमा होने की वजह से विश्वविद्यालय ने उसका नाम काट दिया। आदेश की पत्नी सरिता को बहुत दुख हुआ। उसे अपने पति आदेश पर बहुत गुस्सा आई कि काम की चीजों पर वह पैसे नहीं खर्च करते थे और बेफिजूल शानो-शौकत और दिखावे के भ्रम जाल में फंस कर उटपटांग पैसे खर्च किया करते थे।

और आवश्यक जरूरतों के लिए जब भी आदेश की पत्नी आदेश से पैसे मांगा करती तो आदेश पैसा ना होने का कारण बताकर पैसे नहीं दिया करता था।

सरिता को पढ़ना लिखना बहुत पसंद था। उसने आदेश को बताया कि उसका नाम काट दिया गया है। चार दिन बाद पेपर होने है, इसलिए फीस की व्यवस्था करो वरना मैं मायके चली जाऊंगी और तुम्हारी वजह से मेरा जीवन बर्बाद हो रहा है, ठेकेदार समझ कर पापा ने तुमसे मेरा व्याह करा दिया, उन्हे क्या पता था, की लड़का उड़ाऊ और पियक्कड़ किस्म का हैं। मैं तुमसे बहुत परेशान हूँ, तुम्हारे साथ रह कर जीवन नर्क के समान हो गया हैं। इसलिए मैं दोबारा तुम्हारे यहां नहीं आऊंगी।

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सरिता ने आदेश से इस तरह से आज पहली बार बात की थी, आदेश को सरिता का इस तरह बात करना बुरा लगा, पर आदेश जल्दी ही भाँप गया की गलती सरिता की नहीं हैं, बल्कि खुद उसकी हैं। आदेश सरिता से बहुत प्रेम करता था। आदेश ने सरिता से विश्वविद्यालय की फीस पूछी तो पता चला ₹15000 फीस जमा करने हैं, आदेश के पास वर्तमान में सिर्फ ₹4000 थे।

आदेश का व्यवहार पूरे गांव में था, लेकिन उस व्यवहार की अपनी सीमा थी। जिसका अनुभव आज आदेश को पता चलने वाला था। आदेश एक बातूनी और लापरवाह किस्म का व्यक्ति था इसलिए जब उसने गांव वालों से मदद मांगी तो सब ने मना कर दिया। क्योंकि सबको पता था कि जब भी यह पैसे कमाता है, तो उन पैसो को यह बेफिजूल खर्च कर देता है। इसलिए यह हमारे पैसे वापस नहीं करेगा और हमें बहाने पर बहाना देता रहेगा।

इस तरह से आदेश गांव के हर व्यक्ति के पास मदद के लिए गया। लेकिन किसी ने भी उसकी मदद नहीं की, हर व्यक्ति जो आदेश के साथ बैठकर, उसके भाई के उपहास के किस्से सुन कर ठहाके मार मार के हंसा करते थे, वह सब आज आदेश की मदद करने को तैयार नहीं थी।

आदेश बड़े संकोच के बाद अपने भाई के पास गया और उसे अपनी समस्या बताया, राजेश ने सुनते ही पत्नी साक्षी को बुलाया और ₹15000 आदेश को देने को कहा, आदेश ने कहा कि मेरे पास ₹4000 है मुझे सिर्फ 11000 की जरूरत है। तो राजेश ने उसे टोकते हुए कहा कि ₹15000 तुम रख लो, जो तुम्हारे पास 4000 रूपय है, उसे तुम अपने घर के खर्चे में ध्यान दो।

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आज तुम्हें समझ में आया होगा कि जो मैं करता हूं। वह कंजूसी नहीं वह बचत है। जिससे जरूरत पड़ने पर हम अपने घर पर आई मुसीबतों से बच सकें। इसलिए मेरा तुमको यह सलाह है कि तुम भी अपनी ऊटपटाँग खर्चे की आदत को छोड़ दो और कुछ बचत करना सीखो।

आज आदेश को समझ में आ गया कि जो भैया राजेश बचत करते थे। वह कंजूसी नहीं वह भविष्य के आने वाली समस्याओं का समाधान था।

यह hindi story दो भाइयो की हैं, जिसमे पैसे को बचाने के बारे मे कहा गया हैं। यह hindi story आपको कैसी लगी जरूर नीचे कमेन्ट करके जरूर बताइये गा।  hindi story पसंद आने पर इसे शेयर करना न भूले।

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