जर्मनी का एकीकरण क्या हैं?

World Gk: मध्य यूरोप केकुछ स्वतंत्र प्रांत जैसे की प्रशा, बवेरिया और सैक्सोनी आदि ने मिलकर जर्मन साम्राज्य का 1871 मे निर्माण किया था। इस एकीकरण को ही जर्मनी का एकीकरण कहा गया था।एकीकरण के पहले जर्मनी 31 भागो मे बटा हुआ था।

जर्मनी का एकीकरण किसने किया था?(World Gk)

जर्मनी का एकीकरण वहां के नेता ओटो फॉन बिस्मार्र्क ने किया था। बिस्मार्क प्रशा नाम के एक स्वतंत्र राज्य के प्रधानमंत्री थे। उनके राजा का नाम विलियम प्रथम था। जर्मनी का सबसे ताकतवर राज्य प्राशा था। बिस्मार्क के नेतृत्व मे 31 भागो मे बाटे जर्मनी के स्वतंत्र राज्यो को आपस मे मिलकर एक कर दिया था।

ओटोमन बिस्मार्क कौन था? (World Gk)

आटोमन बिस्मार्क जर्मनी के एक स्वतंत्र प्रांत प्रशा का प्रधानमंत्री थे। उन्हे लोह पुरुष के नाम से जाना जाता था। प्रशा के राजा विलियम प्रथम उन्हे जादूगर कहा करते थे। बिस्मार्क का जन्म 1 अप्रैल 1815 को ब्रेंडनबर्ग मे हुआ था। 1847 मे बिस्मार्क प्रशा की विधान सभा के सदस्य बने। बिस्मार्क कई देशो मे राजदूत के रूप मे अपनी सेवाए दी थी। 23 सितंबर 1862 को बिस्मार्क को प्रशा राज्य का चांसलर बनाया गया। बिस्मार्क जर्मनी के लिए बिल्कुल उसी तरह है, जिस तरह भारत के लिए सरदार वल्लभभाई पटेल हैं। भारत की आजादी के बाद जब राजघराने भारत में ना मिलकर स्वतंत्र राष्ट्र की तरह रहना चाहते थे, तब सरदार वल्लभभाई पटेल ने अपने बुद्धि कौशल और अपने पद का सदुपयोग करके भिन्न-भिन्न होते भारत को एक मजबूत और बड़े राष्ट्र के रूप में एकीकरण किया था। ठीक इसी तरीके से जर्मनी के प्रधानमंत्री बिस्मार्क ने भी 31 खंड में बिखरे हुए जर्मनी को आपस मे मिला कर एक राष्ट्र के रूप में निर्माण किया था।

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बिस्मार्क पूरे जर्मनी को एक करके शक्तिशाली राष्ट्र का निर्माण करना चाहता था। बिस्मार्क के प्रयासों से पूरे जर्मनी को एक राष्ट्र के रूप में एकीकरण किया गया और 8 फरवरी 1871 को विलियम की ताजपोशी की गई और उसे जर्मन संघ का सम्राट घोषित किया गया। बिस्मार्क एक सुलझे हुए तथा दूरदर्शिता वाले प्रशासक थे। जर्मनी के एकीकरण मे सबसे बड़ा रोड़ा फ्रांस था। इस लिए वो फ्रांस से हमेशा सतर्क रहते थे। जर्मनी ने राष्ट्रीयता का संदेशवाहक नेपोलियन बोनापार्ट को माना जाता था। इसके अलावा जर्मनी का आर्थिक राष्ट्रवाद का पितामह “फैड्रिक लिस्ट” को माना जाता था। भारत में जिस स्थान पर सभी राष्ट्रीय नेता एकत्रित होकर भारत के भाग्य का निर्णय लेते हैं, उस स्थान को संसद कहा जाता है ठीक उसी तरीके से जर्मनी में राष्ट्र को लेकर जो सभा आयोजित होती थी, उसे डायट के नाम से जाना जाता था और यह सभा फ्रैंकफर्ट में हुआ करती थी।

प्रधानमंत्री बनते ही बिस्मार्क ने डेन्मार्क के साथ युद्ध क्यो किया?(World Gk)

बिस्मार्क प्रधानमंत्री बनते ही डेन्मार्क पर आक्रमण कर दिया, इस आक्रमण को जर्मनी साम्राज्य की स्थापना की ओर का सबसे महत्वपूर्ण कदम माना जाता हैं। डेन्मार्क और जर्मनी के बीच दो स्वतंत्र राज्य थे, जिन पर डेन्मार्क का प्रभाव था। इन दोनों राज्यो का नाम हॉलस्टीन  और श्लेसविग  हैं, यह दोनों राज्य स्वतंत्र थे। 1863 से डेन्मार्क मे राष्ट्रियता की लहर दौड़ रही थी, जिसके चलते डेन्मार्क ने इन दोनों राज्य को अपना क्षेत्र घोषित कर दिया। हॉलस्टीन  की जनसंख्या जर्मन जाती की थी जबकि श्लेसविग  मे आधे लोग जर्मन जाती के थे और आधे लोग दें जाती के थे। जब डेन्मार्क ने इन दोनों क्षेत्र को डेन्मार्क का क्षेत्र घोषित कर दिया तब बिस्मार्क ने इसका विरोध किया फलस्वरूप दोनों देशो के बीच युद्ध हुआ और डेन्मार्क की इस युद्ध मे हार हो गई।

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बिस्मार्क के पहले जर्मनी की किया स्थिति थी?

1815 से लेकर 1850 के बीच जर्मन राष्ट्र में जर्मनी के पड़ोसी देश ऑस्ट्रिया का अधिपत्य हुआ करता था। उस समय आस्ट्रिया का चांसलर मेटरनिख था। और पूरे यूरोप में लोग उसके प्रति सम्मान की दृष्टि से देखा करते थे या कह सकते हैं यूरोप का सबसे प्रभावशाली नेता मेटरनिख हुआ करता था।जर्मनी 31 खंड मे बता हुआ था।

इसके अलावा जर्मनी को एक राष्ट्र के रूप में बनाने के लिए कई व्यक्तियों के भी प्रयास शामिल है जैसे राके, बोमर, लसर और ना जाने कितने दार्शनिकों ने जर्मनी के एकीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। जैसा कि हमने ऊपर पढ़ा कि जर्मनी की राष्ट्रीय सभा फ्रैंकफर्ट में आयोजित होती थी, इसी तरह राष्ट्र के एकीकरण के बाद राष्ट्र के लिए संविधान लिखने का कार्य भी हुआ और संविधान सभा का गठन किया गया, यह गठन फ्रैंकफर्ट में माई 1848 में किया गया था।

विलियम प्रथम के शासनकाल में प्राशा का रक्षा मंत्री वानरून था और सेनापति वान माल्टेक था। 

बिस्मार्क के नेतृत्व मे सेरेजोवा का युद्ध कब लड़ा गया?

1864 मे डेन्मार्क को धूल चाटने के बाद बिस्मार्क 1866 मे फिर से युद्ध मैदान मे था। इस बार युद्ध आस्ट्रिया के खिलाफ था। सेरेजोवा का युद्ध 1866 में लड़ा गया था, इस युद्ध में ऑस्ट्रिया ने प्रशा के सामने आत्मसमर्पण कर दिया था। 23 अगस्त 1866 में ऑस्ट्रिया और जर्मन संघ के बीच एक संधि हुई। इस संधि को प्राग संधि कहा गया। प्राग संधि के तहत ऑस्ट्रिया जर्मनी का भाग बन गया।

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फ्रांस के शासक निपोलियन तृतीय और जर्मनी का सेडान युद्ध

5 जुलाई 1870 को फ्रांस और प्रशा के बीच सेडान का युद्ध हुआ था। इस युद्ध में फ्रांस की हार हुई और 1 सितंबर 1870 में फ्रांस के शासक नेपोलियन तृतीय ने आत्मसमर्पण कर दिया था। इस युद्ध मे फ्रांस के काफी ज्यादा सैनिक मारे गए थे। बिस्मार्क ने जर्मनी के सम्राट विलियम प्रथम का राज्य अभिषेक वरसाय के राज महल में करवाया था। वरसाय फ्रांस का एक क्षेत्र था। फ्रांस और प्रशा के बीच 10 मई 1871 को फ्रैंकफर्ट में एक संधि हुई। जिसके बाद सूडान के युद्ध में फ्रांस की हार होने के बाद जर्मनी का एकीकरण होने का सपना पूर्ण हो पाया। जर्मनी की राजधानी बर्लिन बनी। इस युद्ध ने इटली के एकीकरण के सपने को भी पूरा किया। जर्मनी और फ्रांस का यही युद्ध अंगे चल कर प्रथम युद्ध का कारण बनी।

सेडान युद्ध के बाद फ्रांस मे क्या परिवर्तन आया?

सेडान युद्ध मे जर्मनी ने फ्रांस को बहुत क्षति पहुचई तथा फ्रांस को आत्मसमर्पण के लिए मजबूर कर दिया। इस युद्ध के बाद जर्मनी पूर्ण रूप से एक राष्ट्र बन गया तथा फ्रांस मे राजनीतिक बदलाव आए। फ्रांस मे राजतंत्र हमेशा के लिए समाप्त हो गया तथा फ्रांस मे तीसरी बार गणतन्त्र की स्थापना हुई, जो अब भी निरंतर जारी हैं।

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