शनिवार को पीपल में जल कब चढ़ाना चाहिए

शनिवार को पीपल में जल सुबह के समय चढ़ाना चाहिए इसके साथ ही शनिवार के दिन शाम को पीपल में सरसों के तेल का दीपक जलाना चाहिए। ऐसा करने से माना जाता है कि सनी की महा दशा से मुक्ति मिलती है।

इसके साथ ही यह ध्यान रखना चाहिए की पीपल की पूजा कभी भी सूर्योदय से पहले नहीं करनी चाहिए। जो व्यक्ति पीपल की पूजा सूरज उगने के पहले करते हैं ऐसे लोगों के घर में दरिद्रता का वास होता है। शास्त्रों में बताया गया है की सूर्य उदय से पहले पीपल में माता लक्ष्मी की बहन अलक्ष्मी का निवास होता है। इसके साथ ही यह भी ध्यान रखें कि रविवार के दिन भी पीपल को जल नहीं चढ़ाना चाहिए। जब भी पीपल को जल चढ़ाने के लिए जाएं तो जल चढ़ाने के लिए तांबा या पीतल से बना हुआ लोटा ही इस्तेमाल करें। पीपल को जल चढ़ाने के बाद पीपल की साथ परिक्रमा करनी चाहिए इसके बाद मन में ही अपने मनोकामना पूर्ण होने का आशीर्वाद मांगना चाहिए। भूलकर भी सूर्य अस्त होने के बाद पीपल को जल नहीं चढ़ाना चाहिए। गीता में बताया गया है कि पीपल भगवान कृष्ण का भी एक स्वरूप है। भगवान कृष्ण ने अर्जुन को गीता का ज्ञान पीपल के वृक्ष के नीचे ही दिया था।

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पीपल को हिंदू धर्म में एक पवित्र माना जाता है। पीपल को देव वृक्ष भी कहा जाता है क्योंकि पीपल में कई देवताओं का निवास होता है। शनिवार के दिन पीपल की पूजा का विशेष अर्थ होता है इसीलिए जो लोग सौभाग्य और सुख प्राप्त करना चाहते हैं उन लोगों को शनिवार के दिन पीपल के पेड़ की पूजा करनी चाहिए। पीपल के पेड़ की पूजा करने से सभी तरह के ग्रह शांत होते हैं और जीवन में सुख और समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है। जो लोग शनि दोष से पीड़ित हैं तथा शनि की ढैया और साढ़ेसाती से जूझ रहे हैं ऐसे लोगों को शनिवार के दिन पीपल के पेड़ की पूजा जरूर करनी चाहिए। शनिवार के दिन पीपल की पूजा करने से सूर्यपुत्र शनि देव प्रसन्न होते हैं।

पीपल पूजा के नियम

शनिवार को सुबह स्नान आदि करके पीपल के पेड़ में जल चढ़ाना चाहिए। जल चढ़ाने के बाद पीपल के पेड़ की सात परिक्रमा करनी चाहिए। ऐसा माना जाता है कि पीपल की परिक्रमा करने से कुंडली में मौजूद कालसर्प दोष से मुक्ति मिलती है।

शनिवार के दिन पीपल की परिक्रमा करते समय पीपल को दोनों हाथों से स्पर्श करना चाहिए और स्पर्श करते समय ओम शं शनिश्चराय नमः मंत्र का मन में जाप करना चाहिए। इस तरीके से पीपल की पूजा करने से जीवन में शनि की ढैया और साढ़ेसाती से मुक्ति मिलती है। जो लोग शनि की ढैया और शनि की साढ़ेसाती से बहुत बुरी तरीके से प्रभावित है ऐसे लोगों को प्रत्येक शनिवार के दिन पीपल के पेड़ में गुड़ और दूध मिला हुआ जल चढ़ाना चाहिए और शाम के समय सरसों के तेल से बना हुआ दीपक जलाना चाहिए। इसके साथ ही पीपल के पेड़ से 11 पत्ते लेकर चंदन की मदद से उन पत्तों में जय श्री राम लिख कर उसकी माला बनाएं और पास के किसी हनुमान मंदिर में जाकर उस माला को हनुमान जी को समर्पित करें ऐसा करने से शनिदेव बहुत जल्दी दूर होता है और जीवन में सफलता और सुख प्राप्त होता है। जो व्यक्ति लंबे समय से अंजान बीमारी से ग्रस्त है और ठीक नहीं हो पा रहा है ऐसा व्यक्ति रात को सोते समय अपने तकिए के नीचे पीपल की जड़ को रखकर सोए तो ऐसा माना जाता है कि जल्दी उसके स्वास्थ्य में सुधार होगा। जिन व्यक्तियों को पितृदोष लगा हुआ है और वह पितृदोष से प्रताड़ित हैं ऐसे लोगों को पीपल के पेड़ लगाने चाहिए। पितृदोष से पीड़ित व्यक्ति जब पीपल का पेड़ लगाता है तो उसे पितृदोष से मुक्ति मिलती है।

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पीपल के पेड़ में दिया कब जलाना चाहिए

पीपल के पेड़ में दिया शनिवार के दिन चलाना चाहिए। दिया को जलाने के लिए सरसो के तेल का इस्तमाल करना चाहिए तथा दिया अगर आटे से बनी हो तो यह और भी उत्तम माना गया हैं। दीया जलाने के बाद पीपल के पेड़ की सात बार परिक्रमा करनी चाहिए तथा इस दौरान “ॐ शं शनिश्चराय नमः” मंत्र का जाप करना चाहिए।

पीपल के पत्ते किस दिन नहीं तोड़ना चाहिए

पीपल के पत्ते को रविवार के दिन नहीं तोड़ना चाहिए। इसके साथ ही रविवार के दिन पीपल की पूजा भी नहीं करनी चाहिए। ऐसा माना जाता हैं की रविवार के दिन पीपल की पूजा करने से शनि देव नाराज होते हैं। रविवार के दिन पीपल की पूजा करना या फिर पीपल के पत्ते तोड़ने से व्यक्ति को शारीरिक पीड़ा का सामना करना पड़ता हैं। लेकिन इसके उलट शनिवार और मंगलवार के दिन पीपल के पत्ते तोड़ कर उनमे राम लिख कर हनुमान जी को चढ़ने से शनि की वक्र दृष्टि से मुक्ति मिलती हैं।

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