दुनिया में एक से बढ़कर एक युद्ध हुए हैं और जिनमें कई लोगों ने अपने प्राण गवाये थे। हर युद्ध के पीछे कुछ ऐसा कारण जरूर होते हैं जो युद्ध को जायज ठहराने के लिए पर्याप्त होते हैं लेकिन इतिहास में कुछ ऐसे युद्ध भी हुए हैं। जिनके पीछे का कारण एकदम बकवास है और इन कारणों को सुनकर आपकी हंसी भी छूट जाएगी तथा आपको उस समय के राजा और सेना नायकों की बुद्धि पर हंसी आएगी। हालांकि ज्यादातर लड़ाई राज्य के सीमाओं के विस्तार के लिए ही लड़ी जाती थी या फिर अपनी सत्ता को लंबे समय तक बनाए रखने के लिए।

कई बार अपनी सत्ता को लंबे समय तक बनाए रखने के लिए दुश्मनों को जड़ से खत्म करने के लिए भी युद्ध लड़े जाते थे। लेकिन आज इस लेख के माध्यम से हम एक ऐसी लड़ाई के बारे में जानेंगे जो सिर्फ एक बाल्टी के लिए लड़ी गई थी। यह घटना 1325 ईसवी के समय की है। सिर्फ एक बाल्टी के कारण 1325 में दो राज्यों के बीच में युद्ध हो गया था। यह युद्ध वर्तमान समय के इटली में हुआ था। वैसे तो इटली की निर्माण 1871 में हुआ था। लेकिन उस समय इटली में दो राज्य थे, एक राज्य बोलोग्ना था, इस राज्य को ईसाई के धर्मगुरु पोप का समर्थन प्राप्त था जबकि दूसरा राज्य मोडेना था, इस राज्य को रोमन सम्राट का समर्थन प्राप्त था।

बोलोग्ना के लोगो का यह मानना था की ईसाई धर्म के सच्चे गुरु पोप हैं जबकि दूसरी तरफ मोड़ेना के नागरिकों का मानना था की रोमन सम्राट ही उनका सच्चा गुरु हैं।

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1325 के पहले भी कई बार दोनो के बीच लड़ाई हो चुकी थी, यह लड़ाई 1296 में हुई थी। इस लड़ाई के बाद दो राज्यों में लगातार विवाद था लेकिन 1325 आते आते अब यह बड़ा रूप ले चुका था। 1325 में आखिरकार मोड़ेना के सैनिक चुपचाप से बोलोग्ना राज्य के एक किले में घुस गए थे। और उस किले से उन सैनिकों ने एक ओक की लकड़ी की बाल्टी को चुरा लिया था। पुराने लोग बताते हैं की उस बाल्टी में कई कीमती रत्न जड़े थे। जब बोलोग्ना के सैनिकों को कीमती रत्न से जड़े बाल्टी के चोरी होने की बात का पता चली तो बोलोग्ना के सैनिको ने इसे बोलोग्ना का अपमान माना और मोड़ेना से उस बाल्टी को वापस करने के लिए कहा लेकिन मोड़ेना के सैनिक ने उस रत्न जड़ित बाल्टी को वापस करने से मना कर दिया।

मोड़ना के सैनिकों ने जब बाल्टी को देने से मना कर दिया तो बोलोग्ना ने मोड़ना के युद्ध की चेतावनी दी। लेकिन युद्ध की चेतावनी का भी मोड़ेना के ऊपर कोई फर्क नहीं पड़ा। मोड़ेना ने बोलोग्ना को बाल्टी देने से माना कर दिया।

तब बोलोग्ना ने बड़े स्तर पर सैनिको की भर्ती की, और कुछ ही समय मे मोड़ेना के विरुद्ध युद्ध की घोषणा कर दी। सन 1325 में बोलोग्ना के पास 32 हजार सैनिको की सेना हो चुकी थी। जबकि मोड़ना के पास उस समय मात्र 7 हजार सैनिक थे। दोनो राज्यों ने सूर्य उगते ही एक दूसरे पर आक्रमण कर दिया। यह लड़ाई उसी दिन की आधी रात तक चली, और आधी रात होते ही युद्ध का निर्णय भी हो गया। युद्ध का परिणाम जान कर आपको हैरानी होगी क्योंकि 7000 सैनिकों वाला मोड़ेना यह लड़ाई जीत गया था। 32000 सैनिकों की बड़ी सेना वाला बोलोग्ना राज्य इतने बड़ी सैनिक होने के बावजूद यह युद्ध हार गया। इस युद्ध में दो हजार सैनिकों को अपने प्राण गंवाने पड़े। 2000 सैनिको की जान सिर्फ एक बाल्टी को खोने या पाने के लिए गई थी। दुनिया की इस मूर्खतापूर्ण लड़ाई को “वॉर ऑफ द बकेट” के नाम से जाना जाता है। यह लड़ाई जिस बाल्टी को लेकर लड़ी गई थी। यह बाल्टी आज भी एक म्यूजियम में रखी हुई है, यह म्यूजियम मैडोना के एक टावर में स्थित है।

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