नारियल पूर्णिमा का महत्व

नारियल पुर्णिमा त्योहार भारत के दक्षिणी राज्यों में मनाया जाता है. इस त्योहार को सबसे अधिक केरल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में मनाया जाता है. यह त्योहार भगवान शिव और देवी पार्वती की पूजा के लिए समर्पित है. नारियल पुर्णिमा के दिन, लोग नारियल, कुमकुम, चंदन, रोली, फूल और मिठाई आदि से भगवान शिव और देवी पार्वती की पूजा करते हैं. वे शिवलिंग पर जलाभिषेक भी करते हैं. इस दिन, लोग उपवास भी रखते हैं और शाम को भजन-कीर्तन और आरती करते हैं. नारियल पुर्णिमा एक बहुत ही शुभ त्योहार माना जाता है और इस दिन लोग भगवान शिव और देवी पार्वती से आशीर्वाद मांगते हैं.

नारियल पुर्णिमा के दिन, लोग नारियल को भी बहुत महत्व देते हैं. नारियल को भगवान शिव का प्रतीक माना जाता है. नारियल को भगवान शिव और देवी पार्वती को अर्पित करने से सभी पापों से मुक्ति मिलती है. नारियल को भगवान शिव और देवी पार्वती की पूजा के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है.

नारियल पुर्णिमा एक बहुत ही महत्वपूर्ण त्योहार है और यह दक्षिण भारत में बहुत धूमधाम से मनाया जाता है. इस दिन, लोग भगवान शिव और देवी पार्वती की पूजा करके उनसे आशीर्वाद मांगते हैं.

नारियल पुर्णिमा के दिन भगवान शिव को कौन से फल चढ़ाये जा सकते है

भगवान शिव को कई तरह के फल चढ़ाए जा सकते हैं. कुछ सबसे लोकप्रिय फल हैं:

  1. नारियल
  2. बेर
  3. आम
  4. केला
  5. नीम्बू
  6. जामुन
  7. अंगूर
  8. खरबूजा
  9. तरबूज
  10. खीरा
  11. सेब
  12. संतरा

इन फलों को चढ़ाने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते हैं.

भगवान शिव को कौनसे फूल अर्पित करना चाहिए

भगवान शिव को कई तरह के फूल अर्पित किए जा सकते हैं. कुछ सबसे लोकप्रिय फूल हैं:

  1. बेला
  2. चमेली
  3. गुलाब
  4. कनेर
  5. धतूरा
  6. नीलकमल
  7. अपराजिता
  8. केतकी
  9. मालती
  10. जूही
  11. नागकेसर

इन फूलों को अर्पित करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते हैं.

भगवान शिव को कौनसे फूल नहीं चढ़ाने चाहिए

भगवान शिव को कुछ फूल नहीं चढ़ाए जाते हैं, जैसे कि केवड़ा, केतकी, कदंब और शिरीष. इन फूलों को चढ़ाने से भगवान शिव नाराज हो सकते हैं.

  1. केवड़ा: केवड़ा का फूल भगवान शिव को अप्रिय माना जाता है. यह फूल भगवान शिव को चढ़ाने से भगवान शिव नाराज हो सकते हैं.
  2. केतकी: केतकी का फूल भी भगवान शिव को अप्रिय माना जाता है. यह फूल भगवान शिव को चढ़ाने से भगवान शिव नाराज हो सकते हैं.
  3. कदंब: कदंब का फूल भी भगवान शिव को अप्रिय माना जाता है. यह फूल भगवान शिव को चढ़ाने से भगवान शिव नाराज हो सकते हैं.
  4. शिरीष: शिरीष का फूल भी भगवान शिव को अप्रिय माना जाता है. यह फूल भगवान शिव को चढ़ाने से भगवान शिव नाराज हो सकते हैं.
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दक्षिण भारत मे नारियल का धार्मिक महत्व

दक्षिण भारत में नारियल को एक पवित्र फल माना जाता है. यह भगवान शिव और देवी पार्वती का प्रतीक माना जाता है. नारियल को भगवान शिव और देवी पार्वती को अर्पित करने से सभी पापों से मुक्ति मिलती है. नारियल को भगवान शिव और देवी पार्वती की पूजा के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है.

नारियल का धार्मिक महत्व इस प्रकार है:

  • नारियल को भगवान शिव और देवी पार्वती का प्रतीक माना जाता है.
  • नारियल को भगवान शिव और देवी पार्वती को अर्पित करने से सभी पापों से मुक्ति मिलती है.
  • नारियल को भगवान शिव और देवी पार्वती की पूजा के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है.
  • नारियल को एक शुभ और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है.
  • नारियल को नए घर में प्रवेश करने के अवसर पर, शादी के अवसर पर और अन्य शुभ अवसरों पर चढ़ाया जाता है.
  • नारियल को एक पवित्र फल माना जाता है और इसे मंदिरों में भी चढ़ाया जाता है.

दक्षिण भारत में नारियल के अन्य उपयोग

नारियल एक बहुत ही उपयोगी फल है. इसका उपयोग भोजन, पेय पदार्थ, औषधि और अन्य कई चीजों के लिए किया जाता है. नारियल का पानी एक बहुत ही पौष्टिक पेय है. यह शरीर को ऊर्जा प्रदान करता है और कई बीमारियों को दूर करता है. नारियल के तेल का उपयोग भोजन पकाने, सौंदर्य प्रसाधन और अन्य कई चीजों के लिए किया जाता है. नारियल का गूदा एक बहुत ही स्वादिष्ट और पौष्टिक पदार्थ है. इसका उपयोग मिठाई, व्यंजन और अन्य कई चीजों के लिए किया जाता है.

नारियल एक बहुत ही बहुमुखी फल है. इसका उपयोग कई तरह से किया जा सकता है. नारियल एक पवित्र फल भी है और इसका धार्मिक महत्व बहुत अधिक है.

सपने में नारियल देखना

सपने में नारियल देखना एक शुभ संकेत माना जाता है. यह जीवन में नए अवसरों, समृद्धि और खुशहाली का प्रतीक है. अगर आप सपने में नारियल देखते हैं, तो यह इस बात का संकेत है कि आपके जीवन में कुछ अच्छा होने वाला है. आपके पास नए अवसर आएंगे, आप समृद्ध होंगे और आप खुश रहेंगे.

  • सपने में नारियल का पानी देखना भी एक शुभ संकेत है. यह स्वास्थ्य, दीर्घायु और समृद्धि का प्रतीक है. अगर आप सपने में नारियल का पानी देखते हैं, तो यह इस बात का संकेत है कि आप स्वस्थ रहेंगे, आप लंबे समय तक जीवित रहेंगे और आप समृद्ध होंगे.
  • सपने में नारियल का तेल देखना भी एक शुभ संकेत है. यह सौंदर्य, शक्ति और समृद्धि का प्रतीक है. अगर आप सपने में नारियल का तेल देखते हैं, तो यह इस बात का संकेत है कि आप सुंदर रहेंगे, आप शक्तिशाली होंगे और आप समृद्ध होंगे.
  • सपने में नारियल का खोपरा देखना भी एक शुभ संकेत है. यह सुरक्षा, शक्ति और समृद्धि का प्रतीक है. अगर आप सपने में नारियल का खोपरा देखते हैं, तो यह इस बात का संकेत है कि आप सुरक्षित रहेंगे, आप शक्तिशाली होंगे और आप समृद्ध होंगे.
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अगर आप सपने में नारियल देखते हैं, तो यह एक शुभ संकेत है. यह जीवन में नए अवसरों, समृद्धि और खुशहाली का प्रतीक है.

शिवलिंग पर नारियल चढ़ाने के फायदे

शिवलिंग पर नारियल चढ़ाने के कई फायदे हैं. नारियल को भगवान शिव का प्रसाद माना जाता है. ऐसा माना जाता है कि नारियल चढ़ाने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते हैं.

नारियल चढ़ाने के कुछ फायदे इस प्रकार हैं:

  • नारियल चढ़ाने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते हैं.
  • नारियल चढ़ाने से भक्तों को शांति और समृद्धि प्राप्त होती है.
  • नारियल चढ़ाने से भक्तों को पापों से मुक्ति मिलती है.
  • नारियल चढ़ाने से भक्तों को आरोग्य प्राप्त होता है.
  • नारियल चढ़ाने से भक्तों को दुर्भाग्य से बचाव होता है.

नारियल चढ़ाने के लिए कुछ नियम हैं. नारियल चढ़ाते समय निम्न बातों का ध्यान रखना चाहिए-

  1. नारियल को साफ और स्वच्छ होना चाहिए.
  2. नारियल को चढ़ाते समय, नारियल को फोड़कर नहीं चढ़ाना चाहिए.
  3. नारियल को चढ़ाते समय, नारियल को शिवलिंग के सामने रखना चाहिए.
  4. नारियल को चढ़ाने के बाद, नारियल को प्रसाद के रूप में बांटा जा सकता है.

नारियल चढ़ाने एक बहुत ही शुभ और लाभकारी कार्य है. जो लोग नियमित रूप से भगवान शिव को नारियल चढ़ाते हैं, उन्हें भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त होता है और उनके जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है.

नारियल पुर्णिमा की कहानी

एक समय की बात है, एक गरीब किसान था. उसके पास एक ही नारियल का पेड़ था. एक दिन, वह नारियल के पेड़ के नीचे बैठा था और रो रहा था. वह बहुत दुखी था क्योंकि उसके पास खाने के लिए कुछ नहीं था. तभी, एक शिव दूत वहां आए और किसान से पूछा कि वह क्यों रो रहा है. किसान ने शिव दूत को बताया कि उसके पास खाने के लिए कुछ नहीं है. शिव दूत ने किसान को एक नारियल दिया और कहा कि इस नारियल को खोलो और देखो. किसान ने नारियल खोला और उसमें से बहुत सारा भोजन निकला. किसान बहुत खुश हुआ और उसने शिव दूत को धन्यवाद दिया. शिव दूत ने कहा कि यह नारियल एक विशेष नारियल है और यह उसे सभी दुखों से मुक्त कर देगा. किसान ने नारियल को अपने घर ले गया और उसे अपने परिवार के साथ खाया. उसके बाद, किसान के परिवार को कभी भी भूख नहीं लगी. किसान बहुत खुश था और उसने शिव दूत को बहुत धन्यवाद दिया.

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नारियल पुर्णिमा का त्योहार उस दिन से मनाया जाता है जब शिव दूत ने किसान को नारियल दिया था. यह त्योहार भगवान शिव और देवी पार्वती की पूजा के लिए समर्पित है. इस दिन, लोग नारियल, कुमकुम, चंदन, रोली, फूल और मिठाई आदि से भगवान शिव और देवी पार्वती की पूजा करते हैं. वे शिवलिंग पर जलाभिषेक भी करते हैं. इस दिन, लोग उपवास भी रखते हैं और शाम को भजन-कीर्तन और आरती करते हैं. नारियल पुर्णिमा एक बहुत ही शुभ त्योहार माना जाता है और इस दिन लोग भगवान शिव और देवी पार्वती से आशीर्वाद मांगते हैं.

यहां एक कहानी है कि भगवान शिव ने नारियल पुर्णिमा का त्योहार क्यों शुरू किया:

एक बार, भगवान शिव और देवी पार्वती कैलाश पर्वत पर रह रहे थे. एक दिन, एक गरीब किसान उनके पास आया और उनसे मदद मांगी. किसान ने कहा कि वह बहुत गरीब है और उसके पास खाने के लिए कुछ नहीं है. भगवान शिव और देवी पार्वती ने किसान की मदद करने का फैसला किया. उन्होंने किसान को एक नारियल दिया और कहा कि इस नारियल को खोलो और देखो. किसान ने नारियल खोला और उसमें से बहुत सारा भोजन निकला. किसान बहुत खुश हुआ और उसने भगवान शिव और देवी पार्वती का धन्यवाद दिया. भगवान शिव और देवी पार्वती ने कहा कि वे चाहते हैं कि हर कोई खुश हो. उन्होंने फैसला किया कि वे हर साल नारियल पुर्णिमा का त्योहार मनाएंगे ताकि लोग भगवान शिव और देवी पार्वती से आशीर्वाद मांग सकें.

नारियल पुर्णिमा का त्योहार एक बहुत ही शुभ त्योहार है. यह त्योहार भगवान शिव और देवी पार्वती की पूजा के लिए समर्पित है. यह त्योहार लोगों को खुशी और समृद्धि का आशीर्वाद देता है.

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