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पूजा करने के लिए कितना अगरबत्ती जलाना चाहिए?


पूजा करने के लिए कितना अगरबत्ती जलाना चाहिए?

पूजा करने के लिए कितना अगरबत्ती जलाना चाहिए?

पूजा करने के लिए अगरबत्ती की संख्या का कोई निश्चित नियम नहीं है। लेकिन कुछ ज्योतिष लोगो के अनुसार 5 अगरबत्ती को उचित संख्या माना जाता है, जो भगवान की पंचभूत स्वरूप का प्रतिनिधित्व करती है। 7 अगरबत्ती को सात ऋषियों का प्रतिनिधित्व माना जाता है, जबकि 9 अगरबत्ती को नौ ग्रहों का प्रतिनिधित्व माना जाता है। इसलिए कई लोगो का मानना हैं की पूजा के लिए जब भी अगरबत्ती को जलाया जाए तो उसकी संख्या 5, 7 और 9 की हो तो बहुत ही उत्तम हैं।

कई ज्योतिष जानकारो के अनुसार अगरबत्ती की संख्या सं होनी चाहिए इसलिए ज़्यादातर लोग पूजा के समय या फिर मंदिर मे अगरबत्ती को जलते समय अगरबत्ती की संख्या 4, 6क्ष 8, 10क्, 10 या फिर 12 की संख्या में जलायी जाती हैं।

कौन कौन से दिन अगरबत्ती नहीं जलाना चाहिए?

कई ज्योतिष विज्ञानियो का मानना हैं की बांस से बनी अगरबत्ती को नहीं जालना चाहिए। इसलिए बहुत से लोगो का मानना हैं की रविवार को अगरबत्ती नहीं जलाना चाहिए। रविवार के दिन अगरबत्ती की जगह धूप का इस्तेमाल करके भगवान की पूजा कर सकते हैं। ऐसा माना जाता है कि रविवार के दिन बांस को जलाने से पितृ दोष लग सकता है। रविवार को सूर्य देव का दिन माना जाता है। इन दोनों दिनों को बांस को जलाने से सूर्य देव और हनुमान जी का अपमान होता है, जिससे पितृ दोष लग सकता है।

क्या रात में अगरबत्ती जलानी चाहिए?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, रात में अगरबत्ती जलाना शुभ माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि अगरबत्ती की सुगंध से घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है। अगरबत्ती मे सुगंध होता हैं जो बिचलित और परेशान मन के लोगो को तनावरहित करता हैं। इसके साथ साथ घर के आसपास नकारात्मक ऊर्जा को दूर करके सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ता हैं। अगर किसी घर के लोगो के सदस्यो के बीच लड़ाई झगड़े होते रहते ऐसे घर में रहने वालों को घर मे सुगंधित अगरबत्ती को जरूर लगाना चाहिए, ऐसा करने से घर मे सकारात्मक ऊर्जा बढ़ेगी और घर के लोगो के बीच लड़ाई झगड़ा बंद हो जाएगा।

बांस की अगरबत्ती का उपयोग क्यों नहीं करना चाहिए?

हिंदू धर्म में, बांस को देवताओं का प्रतीक माना जाता है। इसलिए, कई धार्मिक लोग भगवान एवं देवता को सम्मान देने के लिए लोग बांस से बनी अगरबत्ती को पूजा के लिए इस्तेमाल नहीं करते हैं। इसके अलावा बांस का उपयोग अर्थी बनाने के लिए किया जाता है। इसलिए घर मे बांस की अगरबत्ती का इस्तेमाल बहुत से लोग नहीं करते हैं। हिन्दू ज्योतिष विज्ञानियों के अनुसार बांस को जलाने से पितृ दोष लग सकता है।

बांस की अगरबत्ती के बजाय, आप अन्य सामग्री से बनी अगरबत्ती का उपयोग कर सकते हैं, जैसे कि चंदन, कपूर, या अन्य जड़ी-बूटियाँ। ये अगरबत्ती प्राकृतिक और स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित होती हैं। आज कल बहुत से लोग अगरबत्ती की जगह धूप का इस्तेमाल करते हैं। अगर कोई व्यक्ति अगरबत्ती नहीं इस्तेमाल करना चाहता हैं तो वह धूप का इस्तेमाल कर सकता हैं।

अगरबत्ती में कौन सी गैस पाई जाती है?

अगरबत्ती में कई प्रकार की गैसें पाई जाती हैं। इनमें से कुछ गैसें निम्नलिखित हैं:

  1. सल्फर डाइऑक्साइड (SO2): यह एक रंगहीन, गंधयुक्त गैस है जो सांस की समस्याओं का कारण बन सकती है।
  2. नाइट्रोजन ऑक्साइड (NOx): यह एक रंगहीन, गंधहीन गैस है जो सांस की समस्याओं, कैंसर, और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकती है।
  3. पॉलीसाइक्लिक एरोमैटिक हाइड्रोकार्बन (PAHs): यह एक प्रकार का कार्बनिक यौगिक है जो कैंसर का कारण बन सकता है।
  4. फॉर्मल्डिहाइड: यह एक रंगहीन, गंधहीन गैस है जो सांस की समस्याओं, सिरदर्द, और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकती है।
  5. ट्राइक्लोरोइथेन: यह एक रंगहीन, गंधहीन गैस है जो लीवर, गुर्दे, और अन्य अंगों को नुकसान पहुंचा सकती है।

अगरबत्ती में पाई जाने वाली गैसों की मात्रा अगरबत्ती की सामग्री, निर्माण विधि, और जलने की अवधि पर निर्भर करती है।

अगरबत्ती को इंग्लिश में क्या कहते हैं?

अगरबत्ती को इंग्लिश में "Incense stick" कहते हैं। यह एक छोटी, पतली बत्ती होती है जिसे सुगंधित सामग्री से बनाया जाता है। अगरबत्ती को जलाकर सुगंध फैलाई जाती है। अगरबत्ती का उपयोग धार्मिक और आध्यात्मिक कार्यों, सुगंध के लिए किया जाता है। कई जगह पर अगरबत्ती को इंग्लिश में "joss stick" भी कहा जाता है। यह शब्द दक्षिण पूर्व एशिया में आमतौर पर उपयोग किया जाता है।

अगरबत्ती के प्रकार के आधार पर, इसे इंग्लिश में अलग-अलग नामों से भी जाना जा सकता है। उदाहरण के लिए, चंदन की अगरबत्ती को "sandalwood incense stick" कहा जाता है, और केसर की अगरबत्ती को "saffron incense stick" कहा जाता है।

अगरबत्ती का आविष्कार किसने किया था?

अगरबत्ती का आविष्कार कब और किसने किया था, यह निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता है। हालांकि, माना जाता है कि अगरबत्ती का आविष्कार लगभग 5,000 साल पहले भारत के सिंधु एवं हड़प्पा सभ्यता में हुआ था। प्राचीन लोग अगरबत्ती का उपयोग धार्मिक और आध्यात्मिक कार्यों के लिए करते थे। वे मानते थे कि अगरबत्ती की सुगंध देवताओं को प्रसन्न करती है।

अगरबत्ती का प्रसार अन्य देशों में भी हुआ, जैसे कि चीन, जापान, कोरिया, और दक्षिण पूर्व एशिया। आज, अगरबत्ती दुनिया भर में उपयोग की जाती है। अगरबत्ती का आविष्कार सुगंध के लिए किया गया था। प्राचीन लोग सुगंधित सामग्री को जलाने के तरीकों की खोज कर रहे थे, और उन्होंने अगरबत्ती का आविष्कार किया।

हलकी कुछ धार्मिक लोगो का मानना हैं की अगरबत्ती का आविष्कार त्रेता युग के समय में निषाद राज ने की थी, निषाद राज भगवान शिव और राजा राम के अनन्या भक्त थे। उन्होने जंगल के सुगंधित जड़ीबूटियों का इस्तेमाल करके अगरबत्ती का निर्माण किया था और भगवान को प्रसन्न करने के लिए पूजा के समय वो अगरबत्ती का इस्तेमाल करते थे।

गाय के गोबर से अगरबत्ती कैसे बनाई जाती है?

गाय के गोबर से अगरबत्ती बनाने के लिए निम्नलिखित सामग्री की आवश्यकता होती है:

  1. गाय का गोबर
  2. लकड़ी का बुरादा
  3. कपूर
  4. सुगंधित सामग्री (चंदन, केसर, गुलाब, आदि)
  5. पानी

गाय के गोबर से बनी अगरबत्ती को बनाने की विधि निम्न प्रकार से है:

  1. सबसे पहले, गाय के गोबर को अच्छी तरह से धोकर साफ कर लें।
  2. फिर, गोबर को लकड़ी के बुरादे के साथ मिला लें।
  3. इस मिश्रण में कपूर और सुगंधित सामग्री को मिला लें।
  4. इस मिश्रण को अच्छी तरह से मिला लें।
  5. अब, इस मिश्रण को एक सांचे में डालकर बत्ती का आकार दें।
  6. इस बत्ती को धूप में सुखा दें।

अगरबत्ती सुखाने के लिए, आप इसे धूप में 2-3 दिन तक रख सकते हैं। जब बत्ती पूरी तरह से सूख जाए, तो इसे अगरबत्ती की छड़ी से बांध दें। इस विधि से बनी अगरबत्ती प्राकृतिक और स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित होती है। यह अगरबत्ती की सुगंध भी बहुत अच्छी होती है। अगरबत्ती बनाने के लिए आप निम्नलिखित सुझावों का पालन कर सकते हैं:

  1. अगरबत्ती बनाने के लिए हमेशा ताजा गोबर का उपयोग करें।
  2. गोबर और लकड़ी के बुरादे को अच्छी तरह से मिला लें ताकि बत्ती अच्छी तरह से बन सके।
  3. कपूर और सुगंधित सामग्री को अपनी पसंद के अनुसार मिलाएं।
  4. अगरबत्ती को धूप में सुखाने के लिए एक अच्छी जगह चुनें।

गाय के गोबर से बनी अगरबत्ती बनाने का यह एक सरल तरीका है। आप इस विधि का उपयोग करके घर पर ही अगरबत्ती बना सकते हैं।

अगरबत्ती बनाने की मशीन की कीमत कितनी है?

अगरबत्ती बनाने की मशीन की कीमत इसकी क्षमता, सुविधाओं, और गुणवत्ता पर निर्भर करती है। आमतौर पर, अगरबत्ती बनाने की मशीनों की कीमत 35,000 रुपये से लेकर 1.75 लाख रुपये तक होती है। अगरबत्ती बनाने की मशीनों की कुछ सामान्य कीमतें इस प्रकार हैं:

  1. साधारण अगरबत्ती बनाने की मशीन: 35,000 रुपये से 50,000 रुपये
  2. स्वचालित अगरबत्ती बनाने की मशीन: 50,000 रुपये से 1,00,000 रुपये
  3. उच्च क्षमता वाली अगरबत्ती बनाने की मशीन: 1,00,000 रुपये से 1.75 लाख रुपये

अगरबत्ती बनाने की मशीन खरीदते समय, आपको निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना चाहिए:

  1. मशीन की क्षमता: मशीन की क्षमता से पता चलता है कि मशीन कितनी अगरबत्ती प्रति घंटे बना सकती है।
  2. मशीन की सुविधाएं: मशीन में क्या सुविधाएं हैं, यह भी महत्वपूर्ण है। कुछ मशीनों में स्वचालित मोड होता है, जो आपको समय और श्रम बचा सकता है।
  3. मशीन की गुणवत्ता: मशीन की गुणवत्ता भी महत्वपूर्ण है। अच्छी गुणवत्ता वाली मशीन लंबे समय तक चलेगी और आपको परेशानी नहीं देगी।

अगरबत्ती बनाने की मशीन खरीदने के लिए, आप किसी भी अगरबत्ती बनाने वाले उद्योग से संपर्क कर सकते हैं।

अगरबत्ती कितने प्रकार की होती हैं?

अगरबत्ती को मुख्य रूप से दो प्रकारों में बांटा जा सकता है:

  1. सामान्य अगरबत्ती: ये अगरबत्ती आमतौर पर बांस की छड़ी पर बनाई जाती हैं। इनमें सुगंधित सामग्री के रूप में चंदन, केसर, गुलाब, इत्र, आदि का उपयोग किया जाता है।
  2. विशेष अगरबत्ती: ये अगरबत्ती विभिन्न प्रकार की सामग्री से बनाई जाती हैं, जैसे कि गोबर, लकड़ी, कागज, आदि। इनमें सुगंधित सामग्री के रूप में भी विभिन्न प्रकार के पदार्थों का उपयोग किया जा सकता है, जैसे कि औषधीय जड़ी-बूटियां, धूप, आदि।

सामान्य अगरबत्ती को भी निम्नलिखित प्रकारों में बांटा जा सकता है:

  1. लंबी अगरबत्ती: ये अगरबत्ती आमतौर पर 10-12 इंच लंबी होती हैं। इनका उपयोग पूजा-अर्चना और धार्मिक कार्यों के लिए किया जाता है।
  2. छोटी अगरबत्ती: ये अगरबत्ती आमतौर पर 6-8 इंच लंबी होती हैं। इनका उपयोग घरों और कार्यालयों में सुगंध के लिए किया जाता है।
  3. घंटीदार अगरबत्ती: ये अगरबत्ती आमतौर पर घंटी के आकार में होती हैं। इनका उपयोग पूजा-अर्चना और धार्मिक कार्यों के लिए किया जाता है।
  4. मोमबत्ती अगरबत्ती: ये अगरबत्ती आमतौर पर मोमबत्ती के आकार में होती हैं। इनका उपयोग घरों और कार्यालयों में सुगंध के लिए किया जाता है।

विशेष अगरबत्ती को भी निम्नलिखित प्रकारों में बांटा जा सकता है:

  1. आयुर्वेदिक अगरबत्ती: ये अगरबत्ती औषधीय जड़ी-बूटियों से बनाई जाती हैं। इनका उपयोग स्वास्थ्य के लिए लाभ के लिए किया जाता है।
  2. धूप अगरबत्ती: ये अगरबत्ती धूप से बनाई जाती हैं। इनका उपयोग पूजा-अर्चना और धार्मिक कार्यों के लिए किया जाता है।
  3. मसाला अगरबत्ती: ये अगरबत्ती विभिन्न प्रकार के मसालों से बनाई जाती हैं। इनका उपयोग सुगंध के लिए किया जाता है।

सपने में अगरबत्ती देखना

सपने में अगरबत्ती देखना एक शुभ स्वप्न माना जाता है। यह स्वप्न सुख, शांति, आराम और आशीर्वाद का प्रतीक होता है। अगरबत्ती का सपना देखने का अर्थ व्यक्ति की व्यक्तिगत परिस्थितियों और सपने में अगरबत्ती के साथ होने वाली घटनाओं पर भी निर्भर करता है।

  1. यदि आप सपने में अगरबत्ती जलाते हुए देखते हैं, तो इसका मतलब है कि आपके जीवन में सकारात्मक बदलाव आने वाले हैं। आपके जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आएगी।
  2. यदि आप सपने में अगरबत्ती की सुगंध सूंघते हैं, तो इसका मतलब है कि आपके जीवन में खुशी और आनंद आने वाला है। आपके जीवन में प्रेम और सौहार्द बढ़ेगा।
  3. यदि आप सपने में अगरबत्ती की लौ को देखते हैं, तो इसका मतलब है कि आपके जीवन में आशा और उम्मीद कायम है। आपके जीवन में सफलता और समृद्धि आएगी।
  4. यदि आप सपने में अगरबत्ती को बुझते हुए देखते हैं, तो इसका मतलब है कि आपके जीवन में कोई समस्या या बाधा आने वाली है।
  5. यदि आप सपने में अगरबत्ती को किसी मंदिर या पूजा स्थल में देखते हैं, तो इसका मतलब है कि आपके जीवन में आध्यात्मिकता बढ़ेगी।

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