Akbar aur Birbal – मसक का पानी

Akbar aur Birbal – मसक का पानी

एक बार अकबर भोजन कर रहे थे। बीरबल भी वही पे बैठे थे। अकबर ने कहा बीरबल आओ भोजन कर लों, बीरबल बोले हुजूर मै भोजन का अपमान नहीं करना चाहता, पर मैं भोजन नहीं कर सकता। 

अकबर ने पूछा- क्यो? तब बीरबल ने कहा हुजूर मैं शुद्ध शाकाहारी हूँ। अकबर को समझ आ गया कि मैं कबाब खा रहा हूँ इसलिए बीरबल ने खाने से माना कर दिया।

अकबर ने सोचा कि जान बूझ कर तो बीरबल को मांसाहार खिला नहीं सकता, लेकिन पिला जरूर सकता हूँ। अब एक दिन अकबर बीरबल के साथ शिकार पर गए। शिकार करते-करते थक गए, बीरबल को प्यास लगी, बीरबल ने कहा हुजूर मुझे बहुत ज़ोर कि प्यास लगी हैं। मेरे पास जो पानी था, वह भी खत्म हो गया हैं।

अकबर ने कहा चिंता मत करो, मेरे पास पानी हैं, तुम पी लो बीरबल ने पानी पी लिया। अकबर बहुत खुश हुआ, मन मे बोला, बड़े शाकाहारी बनते हो ना तुम्हें क्या पता कि जो पानी तुमने पिया हैं वह चमड़े के पात्र में था।

बीरबल को लगा कि हुजूर मन मे ही मुस्कुरा रहे हैं। कोई बात जरूर होगी बीरबल ने पूछा हुजूर आप क्यो मुस्कुरा रहे हैं। अकबर ने कहा कुछ नहीं बीरबल महल पहुँच कर बात करेगे, जी हुजूर बीरबल ने कहा।

अकबर महल मे आ कर सभी मंत्रीयो को दरबार मे बुलाया। बीरबल को लगा की अचानक, जहापना दरबार क्यो लगा रहे हैं। जबकि हमेशा शिकार से वापस आने के बाद हुजूर हमेशा आराम फरमाते है। बीरबल समझ गया की कोई बात जरूर हैं।

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अकबर ने सभी मंत्रीयों से कहा आप लोगो मे से कितने लोग शुद्ध शाकाहारी हैं। जो लोग है, वो अपना हाँथ ऊपर करे, बीरबल के अलावा किसी ने हाँथ ऊपर नहीं किया। अकबर ने कहा तुम शाकाहारी हो बीरबल?

जी हुजूर, बीरबल ने जबाब दिया।

अकबर ज़ोर से हसने लगा, सभी को लगा की अचानक हुजूर क्यो हसने लगे। एक मंत्री ने पूछा – क्या हुआ हुजूर! आप अचानक क्यो हस रहे है?

अकबर ने कहा बीरबल की बात पर, शिकार पर बीरबल को प्यास लगी थी, तो मैंने इन्हे जो पानी पीने को दिया था, वह चमड़े के पात्र का था। फिर भी बीरबल अपने आप को शाकाहारी बता रहे है।

अब तो रोज का यही काम हो गया था। बीरबल जब दरबार मे आता सबसे पहले अकबर बादशाह यही कह कर चिड़ाते ‘कहो बीरबल मसक का पानी कैसा, अब तो बीरबल परेशान हो गए, उन्होने सोचा कुछ तो करना पड़ेगा।

एक दिन रात को अकबर सो रहा था। बीरबल ने अपने पूरे शरीर में मैला लगा कर अकबर के कमरे मे प्रवेश किया। सभी सिपाही भी गहरी नीद मे थे। जिसके कारण बीरबल को अंदर जाने मे कोई परेशानी नहीं हुई। बीरबल ने अपना चेहरा भी भयानक बना रखा था, जिससे उन्हे अकबर ना पहचाने।

बीरबल अकबर के सिर के पास खड़ा हो गया। अचानक अकबर की आख खुली तो डर गया। कहने लगा कौन हो तुम? बीरबल ने कहा – मै भूत हू तुम्हें मार डालूगा, अगर तुम अपनी जान बचाना चाहते हो तो जो मै कहूँ करना पड़ेगा। अकबर बोला मंजूर हैं। ठीक हैं तो फिर मेरे शरीर को अपनी जीभ से चाटो।

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अकबर ने कहा ठीक है और चाटने लगा, बीरबल बहुत खुश हुआ, कुछ देर मे कहता है, अब तुम अपनी आंख बंद करो। अकबर ने जैसे ही आंख बंद की बीरबल भाग गया। कुछ देर बाद जब अकबर ने आंख खोली तब वहा पर कोई नहीं था।

अगले दिन जब दरबार में बीरबल आया, तो फिर अकबर ने कहा- कहो बीरबल मसक का पानी कैसा, तब बीरबल बोले रात खबीसा जैसा। अकबर समझ गया की कल रात बीरबल ही था।

अब बीरबल को अकबर ने चिढ़ाना बंद कर दिया।